पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया बहुत ही चैलेंजिंग काम है। इस दौरान बच्चों की सेहत का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। बच्चों का वजन उनकी बीमारी और गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया की डोज दी जाती है। एनेस्थीसिया के बिना कोई भी सर्जरी संभव नहीं होती है। यह बात सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विभाग का तीसरे स्थापना दिवस समारोह में रैपेकॉन 2026 में कही गई।चाइल्ड पीजीआई में मंगलवार को नीडल टू नर्व: मास्टरिंग पीडियाट्रिक्स ब्लॉक्स विषय पर आयोजित कन्टिन्युइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) व कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, विशेषज्ञ चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों व रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रो. अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुआ। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नवीन मल्होत्रा, विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक टेम्पे और डॉ. विमी रेवारी ने बाल एनेस्थीसिया में नवाचार, अनुसंधान व प्रशिक्षण पर बात की। कार्यक्रम के दौरान अल्ट्रासाउंड-गाइडेड क्षेत्रीय एनेस्थीसिया, फेशियल प्लेन ब्लॉक्स, एड्जुवेंट्स, रोगी सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका और मुश्किल परिस्थितियों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रो. पूनम मोटियानी ने विभाग की स्थापना से लेकर अबतक की उपलब्धियां, शैक्षणिक प्रगति और शोध कार्यों के बारे में बताया। इस मौके पर डॉ. अमृत कौर, डॉ. उदिति परमार, डॉ भूमिका समेत अन्य विभागों की फैकेल्टी मौजूद रही।