गुरुग्राम में शनिवार को गुरुग्राम में करीब 30 बुजुर्गों के दल को चकरपुर वजीराबाद बांध में विकसित किए गए वन क्षेत्र में फॉरेस्ट वॉक के लिए पहुंचा। रविवार की सुबह दिल्ली एनसीआर के प्रकृति प्रेमियों के करीब 60 लोगों के समूह ने सिकंदरपुर वन क्षेत्र में बर्ड वॉक किया। इनदोनों कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रकृति से जुड़ना था। कंकरीट का जंगल बन रहे शहर में हरियाली के जो हिस्से हैं, वहां जापानी शिनरिन योकू फॉरेस्ट थेरेपी से शहरीकरण जनित मानसिक तकलीफों पर मरहम रखने का काम इन सामूहिक आयोजनों से किया जा रहा है। 22 अप्रैल को आयोजित होने वाले विश्व पृथ्वी दिवस के पूर्व कार्यक्रमों के तहत इस कार्यक्रम का संयोजन आईएम गुड़गांव ने किया था। आईएम गुड़गांव ने ही सिंकदरपुर, वजीराबाद और नाथूपुर बांध के वन क्षेत्र को विकसित किया है। वन क्षेत्र के कार्यक्रम में फॉरेस्ट थेरेपी और बर्ड वॉक को जोड़ा गया। फॉरेस्ट थेरेपिस्ट चारू गोविल बताती हैं कि इस थेरेपी में धीमी गति से वन क्षेत्र में घुमाया जाता है। यहां पेड़ों की जानकारी नहीं दी जाती है। उनकी पांचों इंद्रियां मिट्टी, पेड़ पौधों को महसूस कर सके। वे अपनी किसी पुरानी खूबसूरत यादों के साथ इसे जोड़ सकें। अकेलापन महसूस करने वाले बुजुर्ग काम के बोझ से तनावग्रस्त युवाओं के लिए यह थेरेपी बहुत कारगर साबित हो रही है। इसमे व्यक्ति को संपूर्णता के साथ प्रकृति से जोड़कर फिर उनके मन के भीतर दबी कुंठाओं, तनाव अकेलेपन को निकालने की प्रक्रिया होती है।