शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन विश्व प्रसिद्व कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि ज्ञान, धर्म, भक्ति का मूल है। पांच दान यश, मान, कीर्ति, नम्रता, सरल सत्य स्वयं परमात्मा है। कलयुग, कलयुग नहीं है बल्कि करयुग है। अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी। जो तन देखता है, शरीर देखता है वह सक्षम नहीं है। सक्षम वहीं है जो मन को देखता है, भाव को देखता है। संसार में सब कुछ सपना है, नींद में जो देखा वो भी सपना है। यह सब असत्य है, सत्य स्वयं राम है। परहित करो, सभी को जाग्रत करो, सम्मान करो, भजन करो, हॅंसते रहो, मस्त रहो, मुस्कराते रहो। भगवान कभी भेद नहीं करता। जीव मात्र एक ऐसा प्राणी है जो भेद करता है। इस मौके पर उन्होंने 12 ज्योर्तिलिंगों की कथा का संक्षिप्त में वर्णन किया। वहीं इस अवसर पर पंडाल में पहुुंचने वाले अतिथियों का स्वागत किया। उक्त उद्योगपति प्रवीण पाराशर व हेमलता पराशर द्वारा शिव महापुराण सेक्टर-66 स्थित फायर बिग्रेड कार्यालय के समक्ष आईएमटी में आयोजित कराई गई।