छत्तीसगढ़ शासन की नक्सली पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर चुके 17 नक्सलियों में से 10 को सरकारी नौकरी दी गई है। इसके साथ ही, 15 नक्सलियों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई। इन नक्सलियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया है। ये सभी नक्सली छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के अभियान से पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके थे।
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह के राजनांदगांव स्थित निवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह लाभ प्रदान किया गया। इस दौरान 24 नक्सल पीड़ित परिवारों के सदस्यों को भी चेक वितरित किए गए। इन परिवारों की मांगों को पूरा करते हुए शासन की ओर से सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम में आत्मसमर्पित नक्सली और नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
पुनर्वास नीति का उद्देश्य
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाना है। यह नीति उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने से उन्हें सुरक्षित और स्थायी निवास भी प्राप्त होता है।
नक्सल पीड़ित परिवारों को सहायता
इस कार्यक्रम के तहत 24 नक्सल पीड़ित परिवारों को भी सहायता प्रदान की गई। इन परिवारों ने नक्सली हिंसा के कारण काफी कठिनाइयों का सामना किया था। सरकार उनकी मांगों को पूरा कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है। यह पहल राज्य में शांति और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि सरकार नक्सलवाद को खत्म करने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।