कोंडागांव जिले में खरीफ फसल वर्ष की शुरुआत के साथ ही खाद-बीज के बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। एग्रीकल्चर विभाग भले ही दावा कर रहा है कि किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद-बीज मिले, इसके लिए जिले के पांचों ब्लॉकों में निगरानी की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बगैर लाइसेंसधारी दुकानों का संचालन प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से हो रहा है। हाल ही में "नायक किसान मित्र केंद्र" पर कृषि विभाग की टीम ने छापा मारा। जांच में पाया गया कि संचालक होरीलाल नायक के पास न तो उर्वरक बेचने का लाइसेंस है, और न ही कोई वैध दस्तावेज। जैविक खाद के नाम पर वह किसानों को बायो स्टिम्युलेंट मनमाने दाम पर बेच रहा था। पूछताछ में संचालक ने इसे चैन मार्केटिंग के माध्यम से बेचना स्वीकारा, लेकिन विभागीय उर्वरक निरीक्षक शशि नाग ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के उर्वरक के विक्रय हेतु विभागीय लाइसेंस अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि बिना लाइसेंस उर्वरक बेचने वालों के खिलाफ दुकान सील करने और जेल भेजने तक की कार्रवाई का प्रावधान है। बावजूद इसके, विभाग की कार्यशैली 'धृतराष्ट्र दृष्टिकोण' जैसी प्रतीत होती है। बीते वर्ष भी किसानों से खाद-बीज ठगी के मामले सामने आए थे, आंदोलन हुए और गिरफ्तारी भी, लेकिन विभाग की लापरवाही जस की तस है। विश्रामपुरी ब्लॉक में भी 35 लाख रुपये की अवैध खाद जब्त की गई थी, लेकिन नोडल अधिकारी दीपक शर्मा ने अनभिज्ञता जताई, जबकि केशकाल एसडीएम अंकित चौहान की कार्रवाई से यह मामला उजागर हुआ था। जिले में कई खाद-बीज दुकानें आज भी बिना लाइसेंस चल रही हैं, जो किसानों को नकली जैविक खाद बेचकर लूट रही हैं। अब देखना होगा कि उपसंचालक कृषि और उर्वरक निरीक्षक जमीनी कार्रवाई करते हैं या केवल फाइलों में खाना-पूर्ति।