एनडीपीएस, विवेचना एवं साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से रविवार को पुलिस कम्युनिटी हॉल में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस और साइबर अपराधों की विवेचना में अभियोजन संबंधी त्रुटियाँ अक्सर दोषियों को लाभ पहुंचा देती हैं। ऐसे में अधिकारियों को त्रुटिरहित विवेचना पर विशेष ध्यान देना होगा और प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) राकेश कुमार वर्मा ने मादक पदार्थों के मामलों में बढ़ते रुझान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे की सप्लाई चेन रोकने के लिए एंड-टू-एंड इन्वेस्टिगेशन और फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन जरूरी है। दोषमुक्ति के कारणों को बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को सटीक विवेचना के लिए प्रेरित किया। विशेष लोक अभियोजक एम.के. देशपांडे ने विवेचना कार्य में खामियों को दूर करने के सुझाव दिए। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अनादि शंकर मिश्रा और दीपा सोनी ने बचाव पक्ष के दृष्टिकोण से विवेचना की कमियों पर प्रकाश डालते हुए पुलिस को सतर्क रहने की सलाह दी। साइबर रेंज रायपुर से आए विशेषज्ञ ने साइबर अपराधों की जांच से जुड़ी तकनीकी जानकारियाँ साझा कीं। इसके अलावा एसपी गुप्ता ने अंधेकत्ल (ब्लाइंड मर्डर) जैसे संवेदनशील मामलों में अनुसंधान की सावधानियों और सूक्ष्म पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।