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कोरबा में एसईसीएल और प्रशासन पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- धरने पर बैठेंगे 35 विधायक

Digvijay Singh Updated Fri, 26 Sep 2025 09:54 PM IST

कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड दीपिका क्षेत्र की खदान के विस्तार के लिए हर स्तर पर मशक्कत की जा रही है। हरदी बाजार और आसपास की जमीन प्राप्त करना इसका एक उद्देश्य है। इस चक्कर में भूस्थापित वर्ग परेशान है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सिलसिले में हरदी बाजार पहुंचकर एक सभा को संबोधित किया और लोगों को सीख देने का काम किया कि वह प्रबंधन और प्रशासन से डरने के बजाय डटकर लड़े। कोयला कंपनी के द्वारा कोयला खदान विस्तार के लिए आसपास की जमीन अर्जित करने कोरबा जिले में लगातार कोशिश की जा रही है। विभिन्न ग्रामों में जमीन प्राप्त करने के बाद अब उसकी नजर हरदी बाजार पर है। लगातार इस इलाके का सर्वे करने की प्लानिंग की गई लेकिन लोगों की विरोध के कारण मामला फेल हो रहा है। इस दौरान हरदी बाजार के लोगों को तरह-तरह से दबाव बनाने और डरने की कोशिश की जा रही है। लोगों ने अपनी समस्या के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अवगत कराया जिस पर वे हरदी बाजार पहुंचे। विस्थापित संगठन के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भूपेश बघेल के अलावा कटघोरा के पूर्व विधायक बौदराम कंवर और पुरुषोत्तम कंवर ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने इस दौरान कई सवाल उठाए और अधिकारियों को निशाने पर लिया सभा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि हरदी बाजार में जो समस्याएं हैं उनका समाधान बेहतर तरीके से करने के बजाय मामले को उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां के लोगों को 2004 के बजाय 2025 के बाजार मूल्य के हिसाब से उनकी जमीन का मुआवजा दिया जाना चाहिए। भूपेश बघेल ने साफ तौर पर कहा कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड भारत सरकार के अधीन आता है और यहां पर भी उसी के नियम लागू होते हैं। इसलिए विस्थापित वर्ग के साथ किसी प्रकार से अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को मनमानी करने से बाज आने को कहा। वही लोगों को लोगों को यह भी समझाया कि कोयला कंपनी से डरने के बजाय उससे जमकर लड़े। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरबा जिले की हरदी बाजार पहुंचकर जिस अंदाज में अपनी बात रखी और लोगों को भरोसा दिया है उसे लग रहा है कि आने वाले दिनों में मामले में कुछ तो राहत देने का रास्ता निकलेगा। हरदी बाजार की सभा के माध्यम से कोयला कंपनी के साथ-साथ सरकार तक यह बात पहुंचाने का प्रयास किया गया है कि लोगों की जमीन बेहद कीमती है और उनके सामने भविष्य की चुनौतियां हैं इसलिए उनके हितों के बारे में विचार किया जाना चाहिए।

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