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CG: देवेंद्र यादव की अर्जी खारिज, चुनाव याचिका में नहीं मिली राहत; हाईकोर्ट ने कहा साक्ष्यों के बाद होगा फैसला

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Updated Sun, 05 Jul 2026 07:42 PM IST

भिलाई नगर से विधायक देवेंद्र यादव को चुनाव याचिका में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोर्चे पर सफलता नहीं मिल सकी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका के दो मुद्दों को प्रारंभिक मुद्दे (Preliminary Issues) मानकर पहले उन्हीं पर निर्णय देने और बिना साक्ष्य दर्ज किए याचिका का निपटारा करने का आग्रह किया था।

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों का निर्णय विवादित तथ्यों और साक्ष्यों पर निर्भर करता है, उनका निपटारा पूर्ण सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर कर भिलाई नगर सीट से देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में चुनावी शपथपत्र में सोशल मीडिया खातों, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी छिपाने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं। दोनों पक्षों के अभिवचनों के आधार पर हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2024 को पांच मुद्दे तय किए थे।

गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट भी देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर चुका है और उन्हें चुनाव याचिका का सामना करने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

देवेंद्र यादव की ओर से आग्रह किया गया कि मुद्दा क्रमांक 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दा मानकर पहले उनका निर्णय किया जाए। उनका कहना था कि निर्वाचित प्रत्याशी ने शपथपत्र में सभी आवश्यक जानकारियां दी थीं, इसलिए बिना साक्ष्य दर्ज किए इन मुद्दों पर निर्णय देकर चुनाव याचिका समाप्त की जा सकती है।

वहीं, चुनाव याचिकाकर्ता प्रेम प्रकाश पांडे की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों मुद्दे विवादित तथ्यों से जुड़े हैं और प्रतिवादी ने याचिका के सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का अपने जवाब में खंडन किया है। इसलिए इनका निर्णय केवल साक्ष्य दर्ज होने के बाद ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला न तो न्यायालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित है और न ही किसी विधिक बाधा से, इसलिए आदेश 14 नियम 2 का सहारा नहीं लिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक मुद्दों पर निर्णय केवल उन्हीं मामलों में दिया जा सकता है, जहां केवल विधि का शुद्ध प्रश्न हो या तथ्य निर्विवाद हों। लेकिन जहां विवादित तथ्यों का परीक्षण तथा मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का मूल्यांकन आवश्यक हो, वहां मुकदमे का पूर्ण ट्रायल करना अनिवार्य है।

अदालत ने माना कि यह तय करना कि प्रत्याशी ने आवश्यक जानकारी छिपाई या नहीं, क्या अधिनियम का उल्लंघन हुआ, क्या कोई चुनावी अपराध या भ्रष्ट आचरण हुआ तथा उसका चुनाव परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ा, ये सभी ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर केवल साक्ष्यों के आधार पर ही दिया जा सकता है। इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने देवेंद्र यादव की अर्जी खारिज कर दी। अब चुनाव याचिका में अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी।

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