जिले के विख्यात मां गंगा मैया मंदिर में बारह सौ से अधिक कन्याओं का नौकायन भोज कराया गया। इस दौरान कन्याओं का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उनकी पूजा भी की गई। उन्हें प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश देने के लिए स्टील की थालियां उपहार में दी गईं।
मंदिर प्रबंधन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष दोनों नवरात्रों में यह आयोजन होता है। इसमें आसपास के स्कूली बच्चों और स्थानीय बच्चों सहित पूरे जिले भर से बच्चों को बुलाकर भोजन कराया जाता है। स्थानीय महिलाओं द्वारा सेवा स्वरूप इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया गया। गंगा मैया मंदिर में नवरात्र उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व अब अंतिम चरणों में है।
हवन पूजन के बाद महाष्टमी के बाद कन्या भोज का विशेष आयोजन किया गया। गंगा मैया मंदिर में घी के एक सौ तीस ज्योति कलश और एक हजार एक सौ इकहत्तर तेल ज्योति कलश जलाए गए हैं। वहीं शीतला माता मंदिर में नौ तेल ज्योति कलश और इक्यानवे तेल ज्योति कलश जलाए जा रहे हैं।
कन्या भोज का आयोजन
यह कन्या भोज महाष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित किया गया। इसमें लगभग बारह सौ से अधिक कन्याएं शामिल हुईं। भोजन से पूर्व उनका सम्मान किया गया। यह आयोजन धार्मिक आस्था और सामाजिक संदेश का प्रतीक बना। मंदिर प्रबंधन हर साल इस परंपरा का पालन करता है।
नवरात्र उत्सव के दौरान गंगा मैया मंदिर में कुल एक हजार तीन सौ एक ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए। इनमें एक सौ तीस घी के और एक हजार एक सौ इकहत्तर तेल के कलश शामिल हैं। शीतला माता मंदिर में भी कुल एक सौ तेल ज्योति कलश जलाए जा रहे हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के अंतिम चरण में हवन पूजन भी किया गया।