उत्तरकाशी। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के भले दावे किए जाए, लेकिन हकीकत यह है कि यहां खिलाड़ियों को मैदान जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी तरसना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि शहर के बीच स्थित रामलीला मैदान को पार्किंग से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। वहीं, मनेरा स्टेडियम में प्रवेश के लिए 800 रुपये पंजीकरण शुल्क अनिवार्य किया गया है, जिससे खिलाड़ी वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं।
सरकार ने खेल महाकुंभ जैसे आयोजन शुरू कर खेल प्रतिभाओं को मंच देने का काम किया है, लेकिन यहां संसाधनों के अभाव में खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही है। एक समय में शहर के बीच स्थित रामलीला मैदान में क्रिकेट व फुटबाल टूर्नामेंट आदि खेल गतिविधियां होती रहती है, लेकिन अब यहां यात्रा सीजन में अस्थायी पार्किंग होती रही है।
पार्किंग के चलते यहां नगर पालिका द्वारा लाखों खर्च कर लगाई हरी घास भी बेकार हो गई। वहीं, पार्किंग से मैदान में कीचड़ व गंदगी का अंबार लगा रहता है। खासतौर पर यहां यात्रा सीजन में पार्किंग से खेल गतिविधियां शून्य हो जाती है। कुछ समय पूर्व शहर के कुछ खिलाड़ियों ने मिलकर रामलीला मैदान को खेल आयोजनों के लिए तैयार किया था, लेकिन वर्तमान में यह पुन: पाार्किंग से बदहाल हो गया है।
फुटबाल खिलाड़ी जसपाल सिंह, अमेरिकन पुरी ने बताया कि कई बार शासन-प्रशासान को मैदान को पार्किंग से मुक्त करने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उधर, मनेरा स्टेडियम शहर के एक कोने पर होने से पहले ही जहां कम खिलाड़ी पहुंच पाते थे। वहीं, अब यहां प्रवेश के लिए 800 रुपये प्रतिमाह पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
जिला क्रीड़ा अधिकारी बबीता बिष्ट का कहना है कि 21 साल से कम आयुवर्ग के लिए 200 रुपये सालाना फीस ली जाती है। एथलेटिक्स व बैडमिंटन के लिए 800 रुपये पंजीकरण शुल्क रखा गया है।