जहां कभी आलू प्याज के भाव बताते ठेली फड़ संचालकों की चिल्लाहट मची रहती थी, आज उसी मैदान में फुटबाल खेलते बच्चों की आवाजें और रेफरी की सीटी बजती सुनाई देती है। शहर के बीचों बीच स्थित आजाद मैदान एक बार फिर खेल प्रेमियों के लिए उम्मीद की किरण बन रहा है।
शहर के बीचों बीच आजाद मैदान स्थित है, लेकिन कई वर्षों से यहां खेल गतिविधियां संचालित नहीं हो रही थी। जिसका कारण यहां शहरभर की ठेली फड़ का संचालन, वाहनों का पार्क किया जाना था। साथ ही यहां कूड़ा भी एकत्र किया जा रहा था, जिससे शहर का हृदय आजाद मैदान शहर के लिए बदनुुमा दाग ही साबित हो रहा था। रामलीना मैदान बचाओ संघर्ष समिति ने मैदान का समतलीकरण किया है। वहीं पालिका भी यहां सौंदर्यीकरण कार्य कराने जा रही है। अब एक बार फिर ठेली फड़ व वाहनों की कैद से आजाद होने के बाद आजाद मैदान में खेल गतिविधियां शुुुरू हो गई है। वहीं रिलायंस फाउंडेशन के कोर्डिनेटर कमलेश गुरुरानी ने यहां सुबह शाम खेलने वाले बच्चों को 17 फुटबाल भेंट की है। स्थानीय खिलाड़ी सुबह शाम यहां बच्चों को फुटबाल के गुर भी सिखा रहे हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटूड़ा का कहना है कि शहर के बीचों बीच खेल मैदान खेल प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए।