तीन लाख रुद्राक्ष की माला से बना शिवलिंग पूजा
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सितारगंज। मीरा बारह राणा स्मारक महाराणा प्रताप के वंशजों की कार्यस्थली है। इसमें महारुद्राभिषेक महोत्सव आयोजित किया गया। इसमें स्थापित शिवलिंग का निर्माण मध्य प्रदेश के नीमच इंदौर आश्रम से आए महामंडलेश्वर श्री-श्री 1008 श्री सुरेशानंद महाराज ने किया। काठमांडू से लाए गए तीन लाख रुद्राक्षों की माला पिरोकर पांच दिन में शिवलिंग तैयार हुआ। यह रुद्राक्ष महारुद्राभिषेक महोत्सव के अंतिम दिन भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटे गए।
15वीं शताब्दी के अंत में मुगल आक्रांताओं के अत्याचार से धर्म, संस्कृति, राष्ट्र की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के वंशज बाराह राणा (थार मरुस्थल) राजस्थान से विस्थापित होकर तराई के सितारगंज क्षेत्र में बसे थे। तब से यह स्थान मीरा बारह राणा के नाम से प्रसिद्ध है। चारों ओर जंगल एवं असुरक्षा के कारण उन्होंने यह स्थान छोड़ दिया था।
जनजाति के लोगों के लंबे आंदोलन के बाद 21 फरवरी 2009 को यहां बाराह राणा स्मारक स्थापना की गई थी। स्थापना दिवस के अवसर बाराह राणा स्मारक समिति की ओर से 21 फरवरी को महारुद्राभिषेक महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित नीमच आश्रम के महामंडलेश्वर, आयुर्वेद प्रयोगशाला के भेषज आचार्य श्री-श्री 1008 सुरेशानंद सरस्वती जी ने तीन लाख रुद्राक्षों की माला पिरोकर शिवलिंग का निर्माण किया।
इसे बनाने में पांच दिन लगे। महोत्सव में रुद्राक्ष से बने शिवलिंग की पूजा के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इन्हें शुक्रवार को महारुद्राभिषेक महोत्सव के समापन पर शिवलिंग पर चढ़े रुद्राक्ष प्रसाद के रूप में बांटे गए। 12 साल तक गुरुकुल में शिक्षा लेने लेकर भेषज उपाधि पाने वाले महामंडलेश्वर सुरेशानंद महाराज ने बताया कि रुद्राक्ष को पहनने से मन शांत तो होता ही है। साथ ही ब्रेस्ट कैंसर, माइग्रेन जैसे रोगों से भी छुटकारा मिलता है। रक्तचाप भी सही रहता है।हास की जानकारी ली। ब्यूरो