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विपदा के समय स्कूल और शिक्षक बने मददगार

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रंजना चौहान। संवाद - फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना संक्रमण के दौरान कई लोगों ने अपनों को खोया तो कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे कई अभिभावक हैं जो स्कूलों की फीस जमा नहीं कर पाए। ऐसे में स्कूलों ने तय किया की बच्चों की पढ़ाई में फीस बाधा नहीं बनेगी। कई स्कूल प्रबंधन ने स्वयं बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा लिया। स्कूलों की कमेटियों ने अपने स्तर से और शिक्षकों की मदद से उनकी फीस कराई।
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स्कूल बंद रहने से अभिभावकों में फीस को लेकर बड़ा असमंजस था। सरकार की ओर से निर्देश के बावजूद कई स्कूलों ने फीस वसूली। इसके चलते कई अभिभावकों ने स्कूल से अपने बच्चों के नाम कटवा लिए। इसके विपरीत कई स्कूल ऐसे भी हैं जिन्होंने बच्चों की फीस माफ करने के साथ उनको नियमित शिक्षण कार्य भी कराया है। कुछ स्कूलों की कमेटी अपने स्तर से फीस एकत्र कर स्कूल के खाते में जमा करा रही हैं। कई स्कूलों के शिक्षकों ने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा ले लिया है। बच्चों को फोन करके स्कूल बुलाया गया कि जितना संभव हो सके वह फीस जमा करा दें लेकिन पढ़ाई को नहीं छोड़ें। लगातार अभिभावकों को भी समझाया जा रहा है कि फीस के कारण बच्चों की पढ़ाई को नहीं रोकें। कई स्कूल प्रबंधकों ने बताया कि हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के कुछ छात्रों की फीस जमा नहीं होने के बावजूद उनको प्रवेश पत्र दिया गया और परीक्षा दिलाई जा रही है।
कोट :- हमारे स्कूल में इंटरमीडिएट के छात्र की फीस का पांच हजार रुपया बाकी था लेकिन वह कोरोना संक्रमण के दौरान आर्थिक तंगी से फीस जमा नहीं करा सका। तब स्कूल समिति ने उसकी फीस माफ कर दी। उक्त छात्र ने परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। वहीं हाईस्कूल के दो छात्रों के पिता का संक्रमण के दौरान निधन होने पर उनकी फीस समिति अपने स्तर से एकत्र कर स्कूल फीस खाते में जमा करा रही है। इसके अलावा पांच छात्र ऐसे हैं जिनका तीन से चार महीने का शुल्क जमा नहीं हुआ था। उसको समिति ने अपने माध्यम से एकत्र करके एकमुश्त जमा करा दिया है। बच्चों की पढ़ाई नियमित चल रही है।
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त्रिवेंद्र सिंह चौहान, प्रधानाचार्य, तुलाराम राजाराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
कोट :- हमारे विद्यालय में कुछ छात्र कोरोना संक्रमण के दौरान अपनी फीस जमा नहीं करा पाए थे। ऐसे छात्रों की फीस हमारे स्कूल के कुछ शिक्षकों ने अपनी जेब से जमा कराई है। लेकिन ऐसे छात्रों की पढ़ाई में फीस को बाधक नहीं बनने दिया गया।
-अजय शंकर कौशिक, प्रधानाचार्य जीबी पंत इंटर कॉलेज
कोट :- कोरोना संक्रमण के दौरान कुछ अभिभावकों के सामने आर्थिक तंगी के साथ रोजमर्रा के राशन आदि की समस्या खड़ी हो गई थी। साथ ही कई अभिभावक स्कूल फीस भरने में सक्षम नहीं थे। ऐसे लोगों को राशन के साथ स्कूल की फीस उपलब्ध कराई ताकि उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे। -रंजना चौहान, शिक्षिका
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