देश में तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद मजदूरों ने भी नए श्रम कानूनों को रद्द करने की आवाज बुलंद कर दी है। रविवार को रुद्रपुर में आयोजित मजदूर सहयोग केंद्र के पहले सम्मेलन में देशभर से पहुंचे मजदूर नेताओं ने नए श्रम कानूनों को रद्द करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। कहा कि मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रमिक शोषण चरम पर पहुंच जाएगा।
किसानों के आगे सरकार को झुकना ही पड़ा
रविंद्र नगर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन (उग्रहां) के प्रदेश महासचिव बल्ली सिंह चीमा ने कहा कि किसानों के आगे सरकार को झुकना ही पड़ा। यह मजदूरों और किसानों की एकता की जीत है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम संहिताओं को वापस ले और सरकारी सार्वजनिक संपत्तियों को बेचना बंद करे। उन्होंने मजदूर नेताओं का दमन बंद करने और जेल में बंद मजदूर नेताओं की रिहाई की मांग की। सम्मलेन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए नए श्रम कानूनों को रद्द कराने के लिए साझा संघर्ष करने का एलान किया गया।
वहां सोमनाथ, सिद्धांत, संतोष, राम निवास, मनोज गुप्ता, अमित, राजेंद्र गुप्ता, अरविंद, गुरमुख, दर्शन लाल, रामजीत, दिनेश पंत, अभिषेक त्यागी, नरेश सक्सेना, भारती पांडे, जमन सिंह, निरजेश, भारती पांडे आदि थे।
मुकुल बने मजदूर सहयोग केंद्र के अध्यक्ष
मजदूर सहयोग केंद्र के सम्मेलन के दौरान केंद्र की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें अमर सिंह को संरक्षक और मुकुल को अध्यक्ष बनाया गया, जबकि दीपक सनवाल को कार्यकारी अध्यक्ष, दर्शन लाल को उपाध्यक्ष, धीरज जोशी को महासचिव, राजू सिंह को संयुक्त सचिव, महेंद्र राणा को कोषाध्यक्ष, हरेंद्र सिंह को प्रचार सचिव, चंद्र मोहन लखेड़ा को संगठन सचिव व गोविंद सिंह को कार्यालय सचिव बनाया गया।
रुद्रपुर में मजदूर सम्मेलन में बोलते भाकियू (उग्रहां) के प्रदेश महासचिव बल्ली सिंह चीमा।