साइबर क्राइम चरम पर है। शायद ही किसी व्यक्ति के पास साइबर अपराधियों का कॉल, फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज नहीं आया होगा। हैरानी तब होती है जब साइबर अपराध रोकने वाले कर्मचारी जुगाड़ से काम कर रहे होते हैं। न तो कार्यालय में पर्याप्त लेपटॉप हैं और न ही कर्मचारियों के बैठने के लिए उचित जगह है। पुलिस कार्यालय में स्थित साइबर सेल कर्मचारियों को काम करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस कार्यालय में वर्ष 2019 में साइबर सेल गठित हुई थी। तब एसआई हिमांशु पंत को साइबर सेल प्रभारी बनाया गया। बाद में इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति होकर उनका तबादला हो गया। इसके बाद कई प्रभारी आए और चले गए। साइबर अपराध को रोकने के लिए साइबर सेल के कर्मचारी 24 घंटे काम कर रहे हैं। अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों के लिए जो इंतजाम किए गए हैं वे नाकाफी हैं। साइबर सेल में इंस्पेक्टर उमेश मलिक के साथ ही दरोगा विपिन जोशी, चेतन रावत, सिपाही चंदन बिष्ट, आनंद कश्मीरा, प्रकाश रेखाड़ी ज्योति चौधरी, पूजा कार्यरत हैं।
उपकरणों की बात करें तो वहां मात्र तीन लेपटॉप ही हैं। छोटे से कार्यालय में कर्मचारियों के बैठने के लिए जगह नहीं है। सीएम पोर्टल में काम करने वाले कर्मचारियों को दूसरे कार्यालय में बैठना पड़ रहा है। लैपटॉप की कमियों का आलम ये है कि कर्मचारियों को अपने निजी लैपटॉप को लाकर काम करना पड़ रहा है। एक साथ छह से अधिक शिकायत आ जाएं तो पीड़ितों को इंतजार करना पड़ता है।
कोट:
साइबर सेल की टीम समिति उपकरणों के बावजूद बेहतर कार्य कर रही है। उपकरणों की कमी और कार्यालय छोटा होने की जानकारी अधिकारियों को दी गई है। साइबर सेल कार्यालय को हाईटैक करने की प्रक्रिया चल रही है। उमेश मलिक, साइबर सेल प्रभारी।
रुद्रपुर में किच्छा बाईपास स्थित कल्याणी नदी के पुल की सड़क पर पड़ा गड्ढा।- फोटो : RUDRAPUR