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आरोपी की पिटाई मामले में ठुकराल पर एनसीआर दर्ज

Tue, 03 Oct 2017 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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MLA Rajkumar Thukral - फोटो : अमर उजाला
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फोन पर धमकी देने के आरोपी की कोतवाली में पिटाई करने पर पुलिस ने भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ गैर संज्ञेय अपराध (एनसीआर) का मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ित ने विधायक के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। इस मामले में पुलिस की  कार्यप्रणाली को लेकर सीओ के स्तर से भी जांच चल रही है।
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क्षेत्रीय विधायक राजकुमार ठुकराल को मेरठ निवासी सतीश शर्मा ने कुछ दिन पहले फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी। विधायक के भाई संजय ठुकराल ने आरोपी सतीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। 27 सितंबर को पुलिस ने सतीश को पल्लमपुर मेरठ स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था। 28 सितंबर को पुलिसकर्मी कोतवाली के कंप्यूटर कक्ष में सतीश से पूछताछ कर रहे थे। इसी बीच विधायक ठुकराल अपने समर्थकों के साथ कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में ही सतीश की पिटाई कर दी थी। मामला तूल पकड़ा तो कांग्रेस ने भी मुद्दा बना लिया था।

एडीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने एसएसपी को जांच के आदेश दिए थे। पुलिस की टीम सतीश के बयान दर्ज करने के लिए मेरठ गई थी। पुलिस को दी तहरीर में सतीश ने बताया कि 28 सितंबर को पुलिस ने धमकी देने के आरोप में धारा 41 का नोटिस तामील कर रिहा कर दिया था। इसके बाद जब वह कोतवाली से निकलने लगा तो विधायक राजकुमार ठुकराल ने कोतवाली परिसर में ही उसकी पिटाई कर दी। सतीश की तहरीर पर पुलिस ने विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ मारपीट और गालीगलौच की एनसीआर दर्ज कर ली है।
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- पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है। वह सत्ता का दुरुपयोग नहीं करेंगे। जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देंगे। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि धमकी देने वाले के पीछे कौन लोग हैं। 
राजकुमार ठुकराल, विधायक रुद्रपुर


तो तहरीर में बदल दी गई जगह
कोतवाली के कंप्यूटर कक्ष में 28 सितंबर को विधायक राजकुमार ठुकराल ने पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों के सामने धमकी देने के आरोपी सतीश के साथ मारपीट की थी। मामला सत्तापक्ष के विधायक से जुड़ा होने की वजह से पुलिस मामले में अपनी तरफ से कार्रवाई करने से बच रही थी। मामला सुर्खियों में आया तब पुलिस हरकत में आई थी। दिलचस्प बात रही कि पीड़ित ने भी तहरीर में घटना कंप्यूटर कक्ष के बजाय कोतवाली परिसर में होने की बात कही है। ऐसे में तहरीर को लेकर भी दबाव साफ देखा जा सकता है। 

पुलिस के पाले में है गेंद
कानून के जानकार बताते हैं कि एनसीआर को असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। जब कोई एनसीआर दर्ज होती है तो पुलिस को विवेचना करने के लिए मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होती है। अगर मजिस्ट्रेट ने इजाजत दी तो मामले में विवेचना के बाद आरोप पत्र भी कोर्ट में दाखिल हो जाता है, लेकिन अधिकांश मामलों में समझौता ही होता है। देखना होगा कि इस मामले में पुलिस मजिस्ट्रेट से विवेचना की अनुमति लेती है या नहीं।

फोन पर धमकी देने के आरोपी सतीश के साथ हुई मारपीट के बाद मिली तहरीर के आधार पर विधायक के खिलाफ एनसीआर दर्ज की गई है। घटना के बाद मामले की जांच सीओ स्वतंत्र कुमार को सौंपी गई थी, जो पांच दिन में पूरी हो जाएगी। अगर जांच में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह भी सुनिश्चित कराया जाएगा कि भविष्य में कोतवाली के किसी भी कक्ष में कोई सीधे दाखिल न हो।
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डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी
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