केंद्र सरकार के आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्डस) के मानकों के अनुसार जिले के 54 एलोपैथिक चिकित्सालयों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टाइप-ए और बी में उच्चीकृत किया था। इसके लिए अस्पतालों में मेडिकल, पैरामेडिकल स्टॉफ के पदों के सृजन होना था, लेकिन लंबे समय बाद भी पदों का सृजन नहीं हो पाया है। जिससे लोगों को उच्चीकृत अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं जनता को देने के लिए 2019 में 54 एलोपैथिक चिकित्सालयों का पुर्नगठन/उच्चीकृरण किया था। आईपीएचएस मानक के अनुसार टाइप-ए के अस्पताल में मेडिकल आफिसर, स्टॉफ नर्स, फार्मेसिस्ट समेत आठ पद और टाइप बी में 12 पदों का सृजन किया जाना है। साथ ही अस्पतालों में बेड़ों की संख्या भी बढ़ाई जानी है, लेकिन लंबे समय बाद भी शासन से पदों का सृजन नहीं हो पाया है। पदों का सृजन नहीं होने से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
वर्तमान में अधिकांश अस्पताल फार्मेसिस्टों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं। साथ ही जरूरी उपकरणों, भवनों का अभाव बना हुआ है। इस संबंध में सीएमओ डा. संजय जैन ने कहना है कि आईपीएचएस के मानकों के अनुसार पुनर्गठन किया गया है। अस्पतालों में जो पद संचालित हैं, उन्हीं से काम चलाया जा रहा है।