मंगलौर। इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) के जवानों पर हुए हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मोबाइल सर्विलांस की भी मदद ली जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने मोबाइल भी बंद कर दिए हैं।
शुक्रवार की सुबह खनन रोकने पहुंचे आईआरबी के जवानों पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया था। साथ ही जवानों से डंडे छीनते हुए उन्हें दौड़ाकर पीटा था। आईआरबी के जवान अर्जुन सिंह रावत की तहरीर के आधार पर पुलिस ने 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, बलवा, हमला और मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले की जांच नारसन पुलिस चौकी प्रभारी लोकपाल परमार को सौंपी गई है। शनिवार को पुलिस ने हमला करने वाले खनन माफिया की पहचान के लिए आसपास के ग्रामीणों से जानकारी ली। साथ ही मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। वहीं, टावर डंप के जरिए घटना वाले दिन घटनास्थल पर चलने वाले मोबाइल नंबरों की डिटेल खंगाल रही है। साथ ही संदिग्ध मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर जांच की जा रही है। सीओ पंकज गैरोला ने बताया कि हमलावरों की तलाश लगातार की जा रही है। जल्द ही मामले में गिरफ्तारी की जाएगी। उधर, चर्चा है कि आईआरबी जवानों ने पुलिस को दो बार हमला होने की सूचना दी थी, जिसके काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। हालांकि, पुलिस अधिकारी इस मामले में जांच करने की बात कह रहे हैं।
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पुलिस पर पड़ रहा राजनीतिक दबाव
आईआरबी जवानों के हमलावर खनन माफिया राजनीतिक रसूख के चलते पुलिस पर दबाव बना रहे हैं। इसके चलते पुलिस भी आरोपियों की गिरफ्तारी में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। सूत्रों की मानें तो खनन माफिया लगातार गिरफ्तारी से बचने के लिए नेताओं से पुलिस उच्चाधिकारियों से सिफारिशें कराने में लगे हैं।