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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनने में नया नियम बना ‘रोड़ा’

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नगर निगम की ओर से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए लागू किया गया नया नियम लोगों के लिए पहाड़ सी चुनौती बन गया है। नए नियम में अब सफाई निरीक्षक जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले के घर जाकर जांच करेंगे। इसके बाद निगम की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। अब ऐसे में सफाई निरीक्षक भी लोगों के घर नहीं जा रहे हैं तो उन्हें निगम के दफ्तर में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस तरफ निगम के अधिकारी भी कोई ध्यान न देकर सिर्फ नियम का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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नगर निगम में इस बार 40 वार्ड हैं। जबकि सफाई निरीक्षक मात्र तीन ही हैं। सफाई निरीक्षकों की कमी की जानकारी होते हुए भी नगर निगम के अधिकारियों ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की जिम्मेदारी भी इन्हें ही सौंप दी है। अधिकारियों ने नया नियम लागू किया है कि अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने से पहले सफाई निरीक्षक संबंधित के घर जाकर जांच करेंगे। जांच के बाद निगम की ओर से प्रमाण दिए जाएंगे। निगम के अधिकारियों का यह नियम अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों के लिए मुसीबत बन गया है। वजह, सफाई निरीक्षक प्रमाण पत्र बनवाने वालों के घर नहीं जा रहे हैं, जिससे प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। आलम यह है कि लोग पिछले साल नवंबर से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। बावजूद इसके प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। नए नियम लागू करने से लोगों में निगम के अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है।
केस नंबर एक
रामनगर निवासी शुभम की पिछले साल छह नवंबर को मृत्यु हो गई थी। उनके परिजन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगर निगम पहुंचे। यहां नए नियम का हवाला दिया गया। मृतक के परिजन तभी से प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन आज तक न कोई सफाई निरीक्षक घर पहुंचा और न ही अधिकारी कोई सुध ले रहे हैं।
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केस नंबर दो
रामनगर निवासी दल सिंह की मृत्यु पिछले साल 15 दिसंबर को हो गई थी। उनके परिजन भी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तभी से नगर निगम के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं है।
केस नंबर तीन
रामनगर निवासी वकील की मौत पिछले साल चार दिसंबर को हुई थी। मृतक के परिजन भी मृत्य प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं और घर जांच करने आने वाले सफाई निरीक्षक की राह ताक रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके अलावा विमला, अरुण, शंति देवी के परिजन भी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पिछले एक माह से चक्कर काट रहे हैं।
फाइलों में कैद पत्र
नगर निगम के अधिकारियों ने प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आने वाले पत्रों को फाइलों में कैद कर रख दिया है। जन्म प्रमाण पत्रों के करीब 250 और मृत्य प्रमाण पत्र के 45 से अधिक प्रार्थना पत्र आए हुए हैं, लेकिन अभी तक एक भी प्रार्थना पत्र पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई है।
नए नियम पर भड़के पार्षद पंकज सतीजा
नए नियम लागू करने पर रामनगर पार्षद पंकज सतीजा ने नाराजगी जताई है। इस बाबत उन्होंने मुख्य नगर आयुक्त नूपुर वर्मा को प्रार्थना पत्र भी दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही से लोगों के प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। अगर नियम लागू किया है तो उस पर अमल क्यों नहीं लाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही प्रमाण पत्र नहीं बने तो वह नगर निगम में अधिकारियों के कार्यालय के बाहर लोगों के साथ धरने पर बैठेंगे।
जो नियम है उसी के आधार पर प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। यह नियम इसलिए लागू किया गया है कि पिछले दिनों प्रमाण पत्र बनवाने में शिकायतें आई थी। जिन लोगों के प्रमाण पत्र बनने के लिए प्रार्थना पत्र आए हैं, जल्द ही जांच करवाकर बनाए जाएंगे।
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- नूपुर वर्मा, एमएनए, नगर निगम, रुड़की
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