एक पखवाड़े से हड़ताल पर चल रहे एनएचएम के संविदा कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। इससे सिविल अस्पताल में मरीजों को बड़ी राहत मिली है। पैथोलॉजी लैब पर खून टेस्ट करवाने वालों की लंबी लाइन लगी। डीईआईसी की ओपीडी में भी करीब आठ बच्चे इलाज के लिए पहुंचे।
सिविल अस्पताल में एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन के बैनर तले एनएचएम और आउटसोर्स से जुड़े करीब 30 कर्मचारी तैनात हैं। ये लंबे समय से हरियाणा की तरह वेतन समेत अन्य मांग कर रहे हैं। इसको लेकर पहले भी कर्मचारी हड़ताल कर चुके हैं। मांग पूरी नहीं होने पर सात दिसंबर को कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। इससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई थी। मरीज ओपीडी में जांच तो लिखवा लेते थे, लेकिन उनकी सभी जांच लैब में नहीं हो पा रही थी। लेबर रूम में अधिकतर स्टाफ एनएचएम का होने के चलते वहां भी सन्नाटा पसरा था। ऐसे में मरीजों को दिक्क्तें आ रही थी।
डीईआईसी यूनिट में पूरा स्टाफ एनएचएम कर्मचारियों का है, इसलिए उस दिन से यूनिट बंद पड़ी थी। यूनिट में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का इलाज होता है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून भी चढ़ाया जाता है। शनिवार को मांगें पूरी किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। सोमवार को सभी कर्मचारी नीयत समय पर अस्पताल पहुंचे, जिससे मरीजों को भारी राहत मिली। मरीजों ने लैब में सभी जांचें करवाईं। वहीं, डीईआईसी यूनिट में भी बच्चों को उपचार दिया गया। इसके अलावा टीबी के मरीजों को भी दवा वितरण शुरू कर दिया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम आदि में भी काम हुआ। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। इससे मरीजों को राहत मिली है।