रुड़की। अब जिले के बेसिक, जूनियर और माध्यमिक स्कूलों की पहचान उनकी दीवार पर हुए पेंट से होगी। शिक्षा विभाग ने हर स्कूल के लिए अलग कलर कोड निर्धारित कर दिया गया है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय अब बाहर से सिल्वर रंग के दिखेंगे तो राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय एशियन व्हाइट कलर के नजर आएंगे। वहीं राजकीय हाईस्कूल/इंटर कॉलेज की बाहरी दीवारें ऑफ व्हाइट कलर की नजर आएगी। इस योजना को चलाने के पीछे शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूलों को भव्य और आकर्षित बनाने की है।
अभी तक जिले में अधिकतर सरकारी स्कूलों में लाइट यलो कलर ही दिखाई देता था। सही मायने में यह कलर ही स्कूलों की पहचान बन गया था। इससे सरकारी स्कूलों की भव्यता कम हो रही थी और स्कूल अपना आकर्षण खो रहे थे। ऐसे में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों को आकर्षण स्वरूप देने के लिए कलर कोड योजना शुरू की है। इसके तहत प्राथमिक, जूनियर और माध्यमिक स्कूलों में अलग-अलग कलर कोड तय कर दिए हैं। विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक के निर्देशानुसार इन कलर कोड को जिले में लागू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि स्कूलों को आकर्षित बनाने के लिए कलर कोड योजना शुरू की गई है। इसके तहत हर स्कूल पर अलग रंग का पेंट किया जाएगा ताकि दूर से ही देखने पर पहचान हो सके कि स्कूल प्राथमिक है, माध्यमिक है या फिर जूनियर है। इसमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बाहरी दीवारों पर सिल्वर कलर होगा, जबकि कक्षाओं के अंदर व्हाइट कलर, खिड़की व दरवाजों पर स्मोक ग्रे और भवन के मध्य एक ग्रे कलर की पट्टी होगी। ऐसे ही राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में बाहरी दीवारों पर एशियन व्हाइट कलर होगा, जबकि कक्षा के अंदर व्हाइट, खिड़की व दरवाजों पर स्मोक ग्रे और भवन के मध्य रेड कलर की पट्टी होगी। इसी तरह राजकीय इंटर कॉलेज में बाहरी दीवारों पर ऑफ व्हाइट, कक्षाओं में व्हाइट, खिड़की व दरवाजों पर फिरोज एक्वालाइट कलर होगा, जबकि इस स्कूल में भवन के मध्य ब्ल्यू कलर की पट्टी होगी।
नए भवनों पर लागू नहीं होगी योजना
मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि जिले में बहुत से ऐसे स्कूल भी हैं, जो हाल ही में नए भवनों में स्थानांतरित किए गए हैं। जबकि बहुत से ऐसे भी हैं, जिनपर हाल ही में रंग रोगन कार्य करवाया गया है। इनमें रंग रोगन की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्कूलों में कलर कोड योजना लागू नहीं होगा। हालांकि निकट भविष्य में यदि किसी स्कूल को रंग रोगन की जरूरत पड़ती है तो उसमें कलर कोड के तहत कलर करवाया जाएगा।