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चुनाव में भीड़ का हिस्सा नहीं बनेंगे कृष्णानगर के लोग

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ऋषिकेश। जनकल्याण संयुक्त संघर्ष समिति कृष्णानगर ने क्षेत्रीय विधायक पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के प्रस्ताव और मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद कृष्णानगर क्षेत्र नगर निगम में शामिल नहीं हो पाया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि वह काम नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद करेंगे। 15 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना देने का ऐलान किया है।
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हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता समिति के संरक्षक डॉ. बीएन तिवारी ने बताया कि वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने कृष्णानगर और वीरभद्र के पशुलोक क्षेत्र को मिलाकर नोटिफाइड एरिया घोषित किया था। उसके बावजूद कृष्णानगर के तीन हजार परिवार और 15 हजार की आबादी को केंद्र सरकार की शौचालय, उज्ज्वला और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम की बोर्ड की बैठक में कृष्णानगर को निगम क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव पास हो रखा है। नगर निगम के प्रथम स्थापना दिवस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसकी घोषणा भी की थी। इसके बावजूद यह क्षेत्र निकाय में शामिल नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने वन विभाग को आइडीपीएल की जो भूमि लीज दी गई थी उसकी लीज इस वर्ष नवंबर में समाप्त हो रही है। लेकिन तीन हजार की आबादी के बारे में कोई नहीं सोच रहा है। बीते 15 वर्षों में कृष्णानगर की जनता को सिर्फ राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन अब लोग अपना राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होने देंगे। प्रेसवार्ता में समिति के अध्यक्ष अशोक बेलवाल, सचिव गुलाब वर्मा, लता देवी, तेज कुमार साहनी, त्रिलोकी नाथ तिवारी आदि शामिल थे।
आईडीपीएल को नगर निगम में करें शामिल
ऋषिकेश। आईडीपीएल क्षेत्र को नगर निगम क्षेत्र में शामिल करने की मांग को लेकर आवासीय कल्याण समिति आईडीपीएल द्वारा दिए जा रहे एक दिवसीय धरने को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य जयेन्द्र रमोला ने समर्थन दिया। जयेंद्र रमोला ने कहा कि जहां एक ओर भाजपा जन आशीर्वाद रैली के माध्यम से जनता का आशीर्वाद मांग रही है, वहीं दूसरी ओर अपनी मूल भूत समस्याओं के लिए लोगों को धरने में बैठना पड़ रहा है। आज आईडीपीएल में रहने वाले लोग अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। यह लोग ना तो नगरीय क्षेत्र में न ही ग्रामीण क्षेत्र में शामिल हैं। ऐसे में यहां रह रहे लोगों को अपनी समस्याओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण यहां रहने वालों की स्थिति बदतर हो रही है। धरने देने वालों में समिति के सचिव सुनील कुटलैहडिया, सूरज कुकरेती, सुमित्रा बिष्ट, रामेश्वरी चौहान, नीलम चंदानी, मौली आदि थे।
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