देश में इस वक्त 740 विश्वविद्यालय और 35 हजार से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनमें से बेहद कम संस्थान हैं जो रैकिंग में आते हैं।
वक्त है कि सबको मिलकर उच्च शिक्षा में गुणवत्ता पर जोर देते हुए शोध को बढ़ावा देना होगा। जौलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यह चिंता जाहिर की।
शुक्रवार को जौलीग्रांट पहुंचे महामहिम प्रणब मुखर्जी ने सबसे पहले स्वामी राम के सपनों को पूरा कर रहे एचआईएचटी ट्रस्ट की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि उत्तराखंड में आम जनता के लिए शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य को स्वामी राम का सपना पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने इसके लिए ट्रष्ट को बधाई दी। इसके बाद विवि प्रशासन को पहले दीक्षांत समारोह की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हमारे देश में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देश में इस समय 740 विश्वविद्यालय और 35 हजार से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थान हैं। बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिहाज से हमारा शैक्षिक ढांचा अपेक्षाकृत कमजोर है।
गुणवत्ता और शोध पर फोकस की जरूरत
विदेशी स्तर के हिसाब से हमें उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और शोध पर फोकस की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें विवि व कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर तैयार करना होगा। इसके तहत फैकल्टी डेवलपमेंट पर खास ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि हमें हायर एजूकेशन सिस्टम को ऐसा बनाना होगा ताकि यहां से साउंड प्रोफेशनल तैयार हों।
अंत में उन्होंने सभी मेडल, डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट हासिल करने वाले युवाओं को शुभकामना देते हुए कहा कि उन्हें अपने वर्तमान पर फोकस करना चाहिए। अतीत को भूलकर भविष्य के प्रति सचेत रहते हुए आगे बढ़ने को वर्तमान में काम करना होगा।
ग्रेजुएशन सेरेमनी तो एक मौका है, लेकिन जीवन में हर दिन ग्रेजुएशन सेरेमनी होती है। उन्होंने कहा कि सपने पूरे होते हैं, लेकिन उनके लिए हौसला होना चाहिए।