नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें उसने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद हरीश रावत का मुख्यमंत्री पद बहाल हो गया है।
ऐसे में कब क्या-क्या हुआ। शक्तिमान के घायल होने से राष्ट्रपति शासन हटने तक का पूरा सियासी घटनाक्रम जानिए एक नजर में-
14 मार्च- भाजपा की रैली में विधायक गणेश जोशी पर पुलिस के घोड़े शक्तिमान को घायल करने का आरोप। विधायक समेत कई के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज।
15 मार्च- विधानसभा सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष ने शक्तिमान को लेकर किया हंगामा। सदन से बाहर भी हुए विधायक के खिलाफ प्रदर्शन।
16 मार्च- शक्तिमान के घायल होने के वीडियो को आधार बनाकर विधायक की गिरफ्तारी की रणनीति हुई तैयार।
17 मार्च- दिनभर पुलिस ने भाजपा नेताओं के लिए हल्द्वानी और दून में दबिश दी। एक गिरफ्तारी भी हुई। देर शाम सरकार को अल्पमत में लाने की भाजपा ने असंतुष्ट विधायकों के साथ मिलकर तैयार की रणनीति। सरकार गिराने के लिए सदन में हंगामे का अमर उजाला ने किया खुलासा।
18 मार्च- सुबह विधायक गणेश जोशी शक्तिमान घोड़े को घायल करने में एक होटल से गिरफ्तार हुए तो शाम को विधानसभा में नौ कांग्रेस के विधायकों ने विनियोग विधेयक पारित करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर वोटिंग की मांग की। इसी दिन से सरकार पर संकट गहराया गया। बागी विधायक भाजपा के साथ मिलकर राज्यपाल से मिलकर विश्वास मत की मांग करने के बाद दिल्ली रवाना हुए।
19 मार्च- राज्यपाल ने सीएम हरीश रावत को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने के लिए भेजा पत्र। सरकार ने बागी विधायकों के घर पर दल बदल कानून के तहत सदस्यता निरस्त करने का नोटिस चस्पा किया।
20 मार्च- विधानसभा अध्यक्ष ने 28 मार्च को सदन आहूत करने का पत्र सदस्यों को भेजा। राज्यपाल से मिली डेडलाइन से सरकार दिखी राहत में।
21 मार्च- भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग राष्ट्रपति दरबार में पहुंची। भाजपा ने 18 मार्च को हुए हंगामे को आधार बनाकर सरकार बर्खास्त करने की रखी मांग।
22 मार्च- अमर उजाला ने खुलासा किया कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। विधायक गणेश जोशी की जमानत याचिका हुई मंजूर।
23 मार्च- राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को 28 मार्च को सदन में मर्यादा बनाए रखने के भेजे संदेश से कई सवाल खड़े कर दिए। इस संदेश से राष्ट्रपति शासन लगने के आधार को और बल मिला।
24 मार्च- बागी विधायकों ने दिल्ली में दावा जताया कि सरकार से कोई समझौता नहीं होगा। विधानसभा अध्यक्ष को कुछ बागियों ने नोटिस के भेजे जवाब।
25 मार्च- बागी विधायकों ने दल बदल कानून को आधार बनाकर सदस्यता समाप्त करने के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पीकर के खिलाफ याचिका खारिज कर दी।
26 मार्च- सीएम हरीश रावत का स्टिंग आया सामने, जिसमें बागी विधायकों को मनाने के लिए खरीद फरोख्त की जिक्र कर रहे थे। स्टिंग आपरेशन से राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना प्रबल हो गई। वहीं कांग्रेस का पूरा खेल बिगड़ गया। केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति को भेजी धारा 356 लागू करने की सिफारिश।