पिथौरागढ़। सीमांत के लोग कीड़ा जड़ी (यारसा गंबू) का दोहन करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में डेरा बनाकर रह रहे हैं। समुद्र तल से 14 हजार फुट की ऊंचाई तक के बुग्यालों में कीड़ा जड़ी का दोहन किया जा रहा है।
देरी से बर्फबारी होने और कोरोना के कारण पिछले वर्षों की तुलना में इस साल कम लोग कीड़ा जड़ी लेने गए हैं। मुनस्यारी में कीड़ा जड़ी दोहन के लिए 187 लोगों ने वन विभाग से अनुमति ली है, लेकिन धारचूला में इस बार किसी भी व्यक्ति ने अनुमति नहीं ली है।
धारचूला विकासखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार बुग्याल, 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित व्याक्षी बुग्याल, 11 हजार फुट पर स्थित सुमदुंग और ब्रह्मकुंड बुग्याल समेत व्यास और दारमा घाटी में 13 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित बुग्यालों में लोग कीड़ा जड़ी लेने पहुंचे हैं।
मुनस्यारी विकासखंड के पोटिंग ग्लेशियर, मिलम, लास्पा, रालम, राजरंभा, नागिनधूरा, हंसलिंग, पंचाचूली के बुग्यालों में लोग गए हैं। मुनस्यारी के वन रेंजर लवराज सिंह पांगती ने बताया कि गोल्पा के 122, तोमिक के 60 और पांछू के पांच लोगों ने कीड़ा जड़ी के दोहन के लिए अनुमति ली है।
कीड़ा जड़ी लेकर लौटे बोना गांव के राजेंद्र बृजवाल ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में इस बार कीड़ा जड़ी कम मिली है। इसलिए कई लोग समय से पहले ही लौट चुके हैं।
धारचूला के वन रेंजर सुनील कुमार ने बताया कि इस बार कीड़ा जड़ी के दोहन के लिए किसी ने अनुमति नहीं ली है जबकि कई लोग 14 हजार फुट की ऊंचाई तक पहुंचे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीड़ा जड़ी के दामों में आई कमी
पिथौरागढ़। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीड़ा जड़ी के दामों में भारी कमी आई है। पिछले कुछ सालों तक 19 से 20 लाख रुपये प्रति किलो की दर से कीड़ा जड़ी बिकती थी, लेकिन अब इसके दाम आठ से नौ लाख रुपये हो गए हैं।
सबसे ज्यादा कीड़ा जड़ी चीन खरीदता है जबकि भारत के लोगों को इसके उपयोग की जानकारी कम है। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने बताया कि इस फंगस में प्रोटीन, पेपटाइड्स, एमिनो एसिड, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व बहुतायत में पाए जाते हैं। इसके सेवन से तत्काल शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसलिए शक्तिवर्द्धक दवा बनाने के साथ ही खिलाड़ी भी इसका सेवन करते हैं।
दो-तीन महीनों तक टेंट लगाकर रहते हैं लोग
पिथौरागढ़। सीमांत के लोग उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कीड़ा जड़ी के दोहन के लिए दो से तीन महीनों तक टेंट लगाकर रहते हैं। ये लोग अपने साथ खाद्यान्न भी ले जाते हैं। कई बार कीड़ा जड़ी के लिए आपसी संघर्ष भी हो जाते हैं, लेकिन इस बार आपसी संघर्ष का कोई मामला सामने नहीं आया है।
जिन लोगों ने कीड़ा जड़ी के दोहन के लिए अनुमति मांगी है। उन्हें अनुमति दी गई है। कोरोना और देरी से बर्फबारी होने के कारण इस बार कीड़ा जड़ी के दोहन करने कम लोग गए हैं।
- डॉ. विनय भार्गव, डीएफओ, पिथौरागढ़।