पिथौरागढ़ (दीपक कापड़ी)। दुर्लभ वन्य जीवों का पता लगाने के लिए वन विभाग और भारतीय वन्य जीव संस्थान संयुक्त रूप से योजना बना रहा है। एक हजार से तीन हजार मीटर तक की ऊंचाई में पाए जाने वाले दुर्लभ श्रेणी के वन्य जीवों की जानकारी के लिए पहली बार ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं।
जिले में कुछ वन्य जीवों के अतिरिक्त दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों की जानकारी किसी के पास नहीं है। अब ट्रैप कैमरे लगाकर इनकी जानकारी जुटाने की योजना बनाई जा रही है। इन कैमरों की मदद से विभाग को वन क्षेत्र में पाए जाने वाले जानवरों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। दुर्लभ वन्य जीवों के ट्रैप होने पर उनके संरक्षण के लिए कार्य भी किए जाएंगे।
वन विभाग दो-दो किमी वन क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाएगा। कैमरों को ऐसी जगह स्थापित किया जाएगा कि उसे कोई नुकसान न पहुंच सके। इसके लिए जल्द पिथौरागढ़ में देहरादून से भारतीय वन्य जीव संस्थान की टीम पहुंचने वाली है, जो पिथौरागढ़ वन विभाग की टीम के साथ जंगलों का निरीक्षण कर कैमरे स्थापित करने का कार्य करेगी।
7250 वर्ग किमी है वन प्रभाग का क्षेत्रफल
सीमांत जिले में 75583.16 हेक्टेअर आरक्षित वन, 277175.09 हेक्टेअर पंचायती वन और 41748.00 हेक्टेअर सिविल वन है। जिले का वन प्रभाग का संपूर्ण क्षेत्रफल 7250 वर्ग किमी है। वन क्षेत्र उत्तर में चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और पूर्व में नेपाल की सीमा से लगा हुआ है। दक्षिण सीमा चंपावत व सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा और पश्चिम सीमा बागेश्वर वन प्रभाग व नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ी हुई है।
कैमरे स्थापित होने के बाद ऐसे जानवरों का भी पता लगेगा जो दुर्लभ की श्रेणी में आते हैं। जल्द भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की टीम पिथौरागढ़ पहुंचेगी। इसके बाद ट्रैप कैमरे लगाने का काम शुरू हो जाएगा। - कोको रोसो, डीएफओ पिथौरागढ़।