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बैजनाथ से लखनपाल का दुर्लभ शिलालेख मिला

Tue, 08 Sep 2015 06:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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बागेश्वर जिले के बैजनाथ मंदिर के महंत के आवास से कार्तिकेयपुर के राजा लखनपाल का एक दुर्लभ शिलालेख मिला है। लखनपाल का शासनकाल 1105 इसवीं माना गया है। इस शिलालेख से पता चलता है कि लखनपाल ने कार्तिकेयपुर में एक भव्य शिव मंदिर बनाया था, जो अतीत में भूकंप के कारण ध्वस्त हो गया था। यह शिलालेख उसी मंदिर के दरवाजे पर उत्कीर्ण था।
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उत्तराखंड शोध संस्थान की कुमाऊं इकाई के अध्यक्ष एवं संस्कृति संवर्धन और मेला वर्गीकरण समिति के सदस्य डा. मदन चंद्र भट्ट ने बताया कि एक सप्ताह पहले बैजनाथ के दौरे के समय उनको यह शिलालेख मिला था। डा. भट्ट उत्तराखंड के विख्यात इतिहासकार हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लखनपाल के दो शिलालेख ज्ञात हैं। एक बैजनाथ संग्रहालय में सुरक्षित है और दूसरा गणानाथ में लक्ष्मीनारायण की मूर्ति के पांवों के पास स्थित है। वह कहते हैं कि लखनपाल ने अपने नाम से चार लखनपुर बनाए थे, इनमें चौखुटिया के पास लखनपुर, रामनगर में ढिकुली के पास लखनपुर, अल्मोड़ा में बाबा कालू सैयद की मजार के पास लखनपुर और अस्कोट में काली नदी के किनारे का लखनपुर हैं। डा. भट्ट ने बताया कि लखनपाल का बेटा अभयपाल था। उसने प्रख्यात विद्वान अभयराज पांडे से शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा ली थी। इसी कारण वह अभयपाल कहलाया। अभयपाल ने अपना राज्य चार बेटों में बांटे थे, इनमें लखनपुर, अस्कोट, ऊकू और देवथल शामिल हैं। वह कहते हैं कि लखनपाल पालवंश का सबसे प्रतापी राजा था। उसकी तुलना कुमाऊं के मल्ल वंश के राजा अशोक मल्ल और साही वंश के राजा दुलासाही से की जाती है। बैजनाथ में मिले नए शिलालेख के बारे में डा. भट्ट का कहना है कि इससे पाल राजवंश के इतिहास की गहराई को जानने में मदद मिलेगी। अभी इसका गहन अध्ययन किया जा रहा है।
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