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Uttarakhand Forest Fire: एक जगह में बुझ रही...तो दूसरे में विकराल होती जा रही आग, ग्रामीणों में दहशत

Wed, 08 May 2024 04:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग एक जंगल में आग पर काबू पा रहा है तो दूसरे में विकराल रूप धारण हो रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
 
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विस्तार
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जंगलों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग एक जंगल में आग पर काबू पा रहा है तो दूसरे में विकराल रूप धारण हो रहा है। चंपावत जिले के गोसनी, फोर्ती, भुमलाई, बमनपुरी जंगल मंगलवार को जलते रहे। पिथौरागढ़ जिले में इमला के जंगलों की आग चौना पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।

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चंपावत जिले के खेतीखान क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोसनी के लोगों की नींद वनाग्नि ने उड़ा रखी है। यहां बांज और चीड़ के जंगल हैं। ऐसे में जरा सा भी जंगल से उठता धुंए लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ा देता है। अभी तक क्षेत्र में चार आग की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि जंगल ही उनका घर है। पशुओं के लिए चारा और ईंधन उन्हें वन देवता से मिलता है।

ऐसे में अगर जंगलों में संकट आता है तो उनकी प्राथमिकता है कि वह भी उसके बदले उनकी रक्षा करें। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आलोक वर्मा, सरपंच महेश चंद्र जोशी, पंकज सिंह, ललित जोशी, नीरज, अमर सिंह, चंद्रकांत ओली, पंकज ओली, मनीष ओली, दीपक ओली, बद्री दत्त कापड़ी, हेम कपड़ी आदि सक्रिय रूप से जंगलों की निगहबानी कर रहे हैं।
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यहां भी जल रहे जंगल
लोहाघाट में सोमवार की देर शाम भुमलाई और मंगलवार सुबह फोर्ती के माणाधुरा के जंगल धू-धू कर जल उठे। अग्निशमन अधिकारी चंदन राम के नेतृत्व में पहुंचे दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, वहीं भुमलाई के जंगल रातभर धधकते रहे। फोर्ती के सरपंच संदीप बगौली, प्रधान प्रतिनिधि शेखर पुनेठा, योगेश बगौली,अजय पुनेठा, चंद्र शेखर बगौली, निखिल पुनेठा ने आग बुझाने में सहयोग किया। लड़ीधुरा महोत्सव समिति के अध्यक्ष नगेंद्र जोशी ने कहा कि जंगलों में भीषण आग लगी हुई है, लेकिन उसे बुझाने के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए गए हैं। 

बनबसा के बमनपुरी गांव से सटे जंगल में लगी आग को दमकल कर्मियों ने बुझा आग पर काबू पा लिया। लीड फायरमैन राजेंद्र नाथ ने बताया कि बमनपुरी से सटे जंगल की आग गांव के खेतों की ओर बढ़ने लगी थी। वहां फायर सर्विस के जीवन सिंह, तनुज सिंह, राम गिरि ने सहयोग दिया। 

मुनस्यारी और बंगापानी ब्लॉक के ग्राम सभा चौना का वन क्षेत्र भीषण आग की चपेट आ गया है। ग्राम प्रधान चौना गणेश जेष्टा ग्रामीणों के साथ आग बुझाने में जुट गए। ग्रामीण हीरा सिंह चिराल ने बताया कि विकराल हुई आग ने पूरे जंगल को अपनी चपेट में ले लिया है। ग्रामीणों के अनुसार पास के गांव इमला के जंगलों में भीषण आग लगी हुई थी। उसी से लगे चौना गांव के वन क्षेत्र में भी आग फैल गई। वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट के नेतृत्व में टीम घटनास्थल पर पहुंची। बंगापानी में जंगलों की आग से छाई धुंध से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कूड़ा जलाने पर सख्ती से लगाएं रोक: डीएम
पिथौरागढ़ में डीएम रीना जोशी ने वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक सप्ताह तक कूड़ा जलाने पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आग की घटनाएं से वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने सभी एसडीएम, तहसीलदार, नगर पालिका के ईओ और वन क्षेत्राधिकारियों को आग की घटनाएं न हों इसके लिए लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। 

जंगल में आग लगाने के आरोप में केस दर्ज
लोहाघाट विकासखंड के कोटला के जंगल में आग लगाना निलाप राम निवासी किमतोली को भारी पड़ा। जंगल में आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने पर वन विभाग की तहरीर पर पंचेश्वर कोतवाली पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। वन विभाग के रेंजर दीप जोशी ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेने पर यह कार्रवाई की गई है। पंचेश्वर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि भारतीय वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

जंगलों की आग बुझाने में आगे आईं वन पंचायतें
पिथौरागढ़ में ऐसा पहली बार हुआ है जब चीड़ ही नहीं चौड़ी पत्ती प्रजाति के वन भी आग से धधक रहे हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों को घास या लकड़ी की सुरक्षा की चिंता में रात भर नींद नहीं आ रही है।

पिथौरागढ़ जिले में इस सीजन में आग की 106 घटनाओं में अब तक 159 हेक्टेयर जंगल खाक हो चुका है। इनमें पंचायती वनों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। पिथौरागढ़ जिले में 1650 वन पंचायतें हैं लेकिन आग लगने पर कम ही लोग बुझाने के लिए घरों से निकल रहे हैं। प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि बेड़ीनाग के अस्याली, दिगतोली, गंगोलीहाट के चिटगल, जरमाल गांव, पिथौरागढ़ के मड़सौन, बड़ाबे, खड़किनी, बांस मेतोली, ग़ुरना, बमनथल, दिगतोली और मुनस्यारी के जोशा, ताराकोट, रसियाबगड़ की वन पंचायतों ने जंगलों को दावानल से बचाने में सहयोग किया। इन वन पंचायतों ने करीब 20 हेक्टेयर से अधिक जंगल को खाक होने से बचाया।

गांव में आग बुझाने वाले नहीं
चंपावत में वनाग्नि की आग बुझाने वाले गांव में कोई नहीं है। बुजुर्ग भीम राम का कहना है कि पहले जहां जंगलों में आग लगती थी तो ग्रामीण उसके बुझने तक नजर रखते थे। अब तो जंगलों से बस धुआं निकलता हुआ दिखता है। कोई मौके पर जाकर नहीं देखता है। खेतीबाड़ी भी लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण कम कर दी है।

फायर ब्रिगेड भी निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
पिथौरागढ़ में आग से धधक रहे पिथौरागढ़ जिले के जंगलों की दावाग्नि नियंत्रण में फायर ब्रिगेड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अप्रैल और मई माह में फायर ब्रिगेड के पास वनों में आग लगने की 31 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें सबसे अधिक 21 घटनाएं अप्रैल में हुई जिनमें फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर वनाग्नि को रोका। 10 घटनाएं मई माह में अब तक हो चुकी हैं। फायर ब्रिगेड ने पिथौरागढ़, धारचूला और डीडीहाट के वन्य क्षेत्रों में आग की घटनाओं के नियंत्रण में पहल की है। डीडीहाट, थल और पिथौरागढ़ में तीन मकानों को भी जलने से बचाया। समय पर दावाग्नि नियंत्रण कर फायर ब्रिगेड लगभग 100 हेक्टेयर से अधिक जंगलों को आग से बचा चुका है। पिथौरागढ़ फायर ब्रिगेड के इंचार्ज दयाकिशन ने बताया कि वनों में आग लगने की सूचना मिलने पर तत्काल जरूरी उपकरणों के साथ जवान मौके पर पहुंचते हैं। वाटर पंप, छोटे पंपों की मदद से आग बुझाई जाती है। इसके अलावा दूरस्थ क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण पाने के लिए बीटिंग मैथड भी अपनाया जाता है।
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गौसनी के ग्रामीण वन विभाग को भी इसकी सूचना दे रहे हैं। वह वन कर्मियों के आने से पहले ही तत्परता से आग बुझाने में विभाग की मदद कर रहे हैं। क्षेत्र के वन कर्मी भी वनाग्नि की रोकथाम के लिए काम कर रहे हैं। लोगों को जंगल का महत्व समझना होगा। गांव की करीब 1500 आबादी है। - नेहा चौधरी, एसडीओ चंपावत

जलन और आंख में दर्द, सांस के मरीजों की बढ़ी दिक्कत
चंपावत क्षेत्र में फैले धुंए के कारण आंखों में जलन, पानी आना और दर्द होने की शिकायतें बढ़ गई हैं। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शौर्य ने बताया कि धुएं हर किसी के लिए परेशानी का सबब बना है। बच्चों से लेकर बड़े आंखों में जलन से परेशान हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि धुएं के कारण लोगों को शुद्ध हवा नहीं मिल पा रही है। उन्हें ऐसे में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। मास्क लगाए रखें ताकि सांस लेने में धुआं एकदम अंदर न जाए। उधर, जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया कि वनाग्नि के चलते पर्यटन में किसी तरह कमी नहीं आई है। 

जंगलों की आग के प्रति सरकार संवेदनहीन : टम्टा
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा ने कहा कि जंगलों की आग के प्रति सरकार संवेदनहीन हो गई है। इस आपदा के समय में प्रदेश के सीएम को आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए खुद नेतृत्व कराना चाहिए, लेकिन वह दूसरे राज्यों में विभाजनकारी एजेंडे से आग लगाने का कार्य कर रहे हैं।

मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार और वन विभाग के पास आग पर काबू पाने के लिए कोई योजना नहीं है। सरकार 70 प्रतिशत से अधिक जंगल जलने के बाद योजना बनाने का कार्य कर रहे हैं। सीएम और ब्यूरोकेसी को खुद मोर्चा संभालकर जंगलों की आग पर काबू पाने का कार्य करना चाहिए था, लेकिन सीएम जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अंजू लुंठी, वरिष्ठ नेता महेंद्र लुंठी, पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश पंत आदि मौजूद रहे। संवाद

दो विभागों के अलग-अलग आंकड़े
चंपावत जिले में जंगलों के जलने के आंकड़े भी एक समान नहीं हैं। वन विभाग 57 वनाग्नि की घटनाएं बता रहा है तो अग्निशमन विभाग के पास वनाग्नि के 108 मामले हैं। इसमें लोहाघाट अग्निशमन के पास 62 वनाग्नि की सूचनाएं आई हैं। जबकि टनकपुर अग्निशमन के पास 46 वनाग्नि की सूचनाएं आई है। डीएफओ आरसी कांडपाल ने बताया कि आग अपने आप नहीं लगती है। इसे क्षेत्र के अराजक तत्वों ही अंजाम दे रहे हैं। अभी 12 नामजद सहित कुल 42 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए गए हैं। वर्तमान तक आग बुझाने में 12 से अधिक कर्मचारी घायल भी हुए हैं। इधर डीएफओ ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधा नहीं होने के कारण वनाग्नि की घटनाएं मिलना आसान नहीं हो रहा है।

वनकर्मियों की जंगलों में गुजर रही रातें
चंपावत। भिंगराड़ा क्षेत्र समेत अन्य स्थानों पर वन विभाग के कर्मियों की रातें जंगलों के बीच कट रही है। कई बार तो रात का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। वनाग्नि की रोकथाम के लिए होमगार्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भिंगराड़ा रेंज के रेंजर हिमालय सिंह टोलिया ने बताया कि वन विभाग के कर्मी 24 घंटे सेवा दे रहे हैं।
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