ज्योलिंकांग तक सड़क बनने से सुगम हुई आदि कैलाश यात्रा
केएमवीएन की ओर से संचालित आदि कैलाश यात्रा सबसे पहले वर्ष 1991 में शुरू हुई थी। 1998-99 में मालपा हादसा और उसके बाद कोरोना काल में यात्रा बंद रही। पहले यात्री 98 किमी की पैदल दूरी तय कर यात्रा करते थे। अब ज्योलिंगकांग तक सड़क होने से यात्रा काफी सुगम हो गई है। केएमवीएन पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि पूर्व में यात्री पहले पड़ाव धारचूला से पांगू, सिरखा, गाला, मालपा, बूंदी, गुंजी से कालापानी और नाभीढांग पहुंच ओम पर्वत के दर्शन करते थे। नाभीढांग से वापस गुंजी पहुंच फिर कुटी से ज्योलिंगकांग पहुंचते थे। वर्ष 2019 से पहले तक आदि कैलाश की यात्रा में 15-16 दिन का समय लगता था जबकि अब दो-तीन दिन में यात्री यात्रा पूरी कर लेते हैं। शुरुआती दौर में दो-तीन दल में ही यात्री पहुंचते थे। बाद में यह संख्या 18 दलों तक पहुंची। इस बार जून माह तक ही 15 दलों की बुकिंग हो चुकी है।
यात्रा मार्ग अभी भी पूरी तरह सुगम नहीं
आदि कैलाश यात्रा मार्ग अभी पूरी तरह सुगम नहीं है। बीआरओ ने कड़ी मशक्कत के बाद सड़क तो बना ली है लेकिन अभी नजंग, मालपा, मलारी, बूंदी, छियालेख, गर्ब्यांग में खतरा बना हुआ है। गुंजी से कालापानी मार्ग भी सुगम नहीं है। पिछले दिनों यात्रा से लौटे भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कई जगहों पर बदहाल मार्ग को ठीक किए जाने का अनुरोध किया है।