नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से की जा रही अनिवार्य कटौती को गलत करार देते हुए इसे संविधान की धारा 300 के तहत उल्लंघन बताया। इस धारा के तहत पेंशन को हर कार्मिक की संपत्ति माना गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 18 अगस्त तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए भी कहा है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी गणपत सिंह बिष्ट और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 21 दिसंबर 2020 को एक शासनादेश जारी कर उनकी अनुमति के बिना स्वास्थ्य बीमा के नाम पर पेंशन से 1 जनवरी 2021 से अनिवार्य कटौती शुरू कर दी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पेंशन उनकी व्यक्तिगत संपत्ति है। सरकार उनकी पेंशन से कटौती नहीं कर सकती है। यह असांविधानिक है। पूर्व में कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा का खर्च सरकार वहन करती थी, लेकिन अब स्वास्थ्य बीमा के नाम पर उनकी पेंशन से हर माह कटौती की जा रही है।