हल्द्वानी। वैश्य महासभा रजिस्टर्ड के नई कार्यकारिणी के द्विवार्षिक चुनाव को लेकर बुलाई गई आम सभा में बखेड़ा हो गया। अध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति न बनने के बाद विवाद बढ़ा तो कुर्सियां फेंकनेे तक की नौबत आ गई। चर्चा है कि हवा में लाइसेंसी पिस्टल भी लहराई गई। वरिष्ठ सदस्यों के हस्तक्षेप के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी और संरक्षक मंडल को चुनाव स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी।
महाराजा अग्रसेन भवन रामपुर रोड में वैश्य महासभा की नई कार्यकारिणी के चुनाव के लिए शनिवार को आम सभा बुलाई गई थी। बैठक की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई। वर्तमान कार्यकारिणी ने अपने कार्यों और आय-व्यय का ब्योरा रखा। इसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी सुशील अग्रवाल पप्पी ने चुनाव की घोषणा की और पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न कराने का प्रयास किया। अध्यक्ष पद पर दो लोगों की उम्मीदवारी के कारण एक पक्ष ने चुनाव कराने की मांग की। इस बीच बहस शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि कुर्सियां फेंकी जाने लगीं। आरोप है कि किसी ने लाइसेंसी पिस्टल हवा में लहरा दी इससे मौजूद सदस्य बाहर निकलने लगे। हालांकि पिस्टल किसने निकाली इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। न ही यह मामला पुलिस तक गया। करीब 20 से 25 मिनट चले विवाद और हंगामे के बीच जब समाधान नहीं निकला तो वरिष्ठ सदस्यों को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्य चुनाव अधिकारी सुशील अग्रवाल पप्पी और संरक्षक मंडल ने चुनाव स्थगित करने की घोषणा कर दी। आम सभा में वैश्य सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, महामंत्री विनीत अग्रवाल, कोषाध्यक्ष भवानी शंकर, संरक्षक बिंदेश गुप्ता, भगवान सहाय, श्रीकांत खंडेलवाल, सुभाष गुप्ता, बद्री प्रसाद गुप्ता, राजेंद्र प्रसाद गोयल, राजीव अग्रवाल, रामबाबू जायसवाल, सुधीर जैन, सीमा देवल, रजत माहेश्वरी, भोलानाथ केसरवानी, महेश कुमार साहू, सतीश खंडेलवाल, गजानंद गुप्ता, किशन लाल गुप्ता मौजूद रहे।
कोट
अध्यक्ष के लिए दो लोगों का नामांकन हुआ। महामंत्री पद के लिए एक व्यक्ति का नाम आया। अध्यक्ष पद पर आम सहमति नहीं बन पाने के कारण चुनाव स्थगित करने पड़े।
- विनीत अग्रवाल, महामंत्री वैश्य महासभा।
चुनाव अधिकारी के इस्तीफे की मांग
हल्द्वानी। वैश्य समाज के आजीवन सदस्य विरेंद्र गुप्ता ने कहा कि वैश्य समाज की नई कार्यकारिणी के चुनाव में चुनाव अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में विफल रहे हैं। इसकारण दशकों पुरानी संस्था में इस तरह की नौबत आई। उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारी को बिना देरी किए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए ताकि नया चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जा सके। उन्होंने संरक्षक मंडल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समाज की एकजुटता के लिए निष्पक्ष होना चाहिए। चहेते प्रत्याशी को चुनाव में विजय दिलाने के लिए पद का दुरुपयोग गलत है।