कोरोना के बीच लॉकडाउन से पहली बार छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का डिजिटलीकरण हुआ। उन्हें ऑनलाइन तकनीक से पढ़ाई करने का मौका मिला। इससे वह तकनीकी तौर पर मजबूत भी हो गए हैं। भविष्य में यदि कोरोना संक्रमण की की चौथी लहर आती है, तो बच्चों को ऑनलाइन पढ़ने में आसानी होगी।
कई स्कूलों के शिक्षकों ने विद्यालय खुलने के बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई को जारी रखा है। शिक्षकों का कहना है कि शुरूआत में ऑनलाइन पढ़ाई में स्वयं और बच्चों को ढालने में परेशानियों का सामना करना पड़ा। घंटों तक मोबाइल पर गुजारने के कारण कई प्रकार की दिक्कतें भी आई।
कोरोना के बाद शिक्षण व्यवस्था का पूर्ण रूप से डिजिटलीकरण हो गया है। कोरोना के बीच जिले के करीब सभी स्कूलों के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ा गया। ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई करना छात्र-छात्राओं के लिए अब कोई नई बात नहीं है। लॉकडाउन के बीच बच्चे तकनीकी तौर पर मजबूत हुए हैं। शुरू में ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ पाना सभी बच्चों के लिए संभव नहीं हो पाया। सरकार भी डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है। दसवीं और 12 के बच्चों को टैबलेट के लिए राशि बांटी गई है। ताकि भविष्य में सभी ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ ले सकें।
- कुंवर सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी।
कोरोना संक्रमण के कारण डिजिटल क्रांति का असर दौर शुरू हुआ है। एजूकेशन फ्रॉम होम से शिक्षा में परिवर्तन आया है। शुरू में ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्राओं का पढ़ा पाना मुश्किल रहा। कई बच्चे मोबाइल न होने के कारण ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ पाए। कोरोना ने तकनीकी तौर पर बच्चों को मजबूत किया है। ऑनलाइन पढ़ाई अब उनके लिए कोई नई बात नहीं है। डिजिटल शिक्षा का दौर बढ़ते जा रहा है। - सोनू मेहता, प्रधानाचार्य, अटल उत्कृष्ट विद्यालय फूलचौड़।