रामपुर रोड का सफर इंसान ही नहीं, बेजुबानों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। हल्द्वानी से रुद्रपुर के बीच जनवरी से सितंबर तक 100 से अधिक हुए हादसों में 19 लोगों की मौत हो चुकी है, घायलों की संख्या कई गुना ज्यादा है। बेलगाम वाहनों की टक्कर से बाघ के बाद अब हथिनी की मौत हो गई है। इसके बावजूद वाहनों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए जिम्मेदार अफसर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं, सिर्फ चेतावनी बोर्ड को ही काफी समझा जा रहा है।
कुछ समय पहले ही रामपुर रोड का चौड़ीकरण हुआ है। इससे थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन वाहनों की रफ्तार बेकाबू हो गई है। सड़क पर डिवाइडर न होने से वाहन चालक हर समय ओवरटेक की जुगत मेंं रहते हैं। शहर में बड़े वाहन रोडवेज स्टेशन से देवलचौड़ तक धीमी रफ्तार से चलते हैं। यहां से चौड़ा मार्ग मिलते ही वाहनों की रफ्तार बेकाबू हो जाती है। यही हाल रुद्रपुर की तरफ से आने वाले वाहनों का होता है। रुद्रपुर के बाद से जंगल के सफर में वाहनों की रफ्तार कम नहीं होती है। शहर की तरफ बढ़ते हुए पंचायतघर के बाद देवलचौड़ तक भी वाहन तेज गति से आते हैं। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे हैं।नहीं लगे हैं स्पीड डिटेक्शन कैमरे-
रामपुर रोड पर ओवरस्पीड की वजह से कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक यहां स्पीड डिटेक्शन कैमरे नहीं लगवाए हैं। सड़क पर स्पीड के चेतावनी बोर्ड तो लगे हैं लेकिन लोग केवल चेतावनी पढ़कर कहां मानते हैं?
ये हैं रामपुर रोड पर गति के मानक-
चेतावनी बोर्ड के अनुसार-
ओवर स्पीड मामले में की गई कार्रवाई-