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गांधी नीति का पालन होता तो नहीं बनते रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे हालात: नीमा बहन

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कौसानी के अनासक्ति आश्रम में हुई गांधी रिविजिटिंग यात्रा की संगोष्ठी में बोलते कार्यक्रम समन्व? - फोटो : BAGESHWAR
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कौसानी/गरुड़/बागेश्वर। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की रीविजिटिंग गांधी यात्रा का कौसानी से आगाज हो गया है। यात्रा के शुभारंभ से पूर्व अनासक्ति आश्रम में हुई संगोष्ठी में मुख्य वक्ता लक्ष्मी आश्रम की संचालिका नीमा बहन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार और सिद्धांतों को आगे रखा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। कहा कि अगर गांधी के दर्शन का पूरी दुनिया अनुसरण करती तो रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं होता।
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अनासक्ति आश्रम में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक और साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने किया। उन्होंने आजादी में उत्तराखंड के योगदान पर चर्चा की और कुली बेगार आंदोलन पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम समन्वयक डायट प्रवक्ता रवि कुमार जोशी ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य लोगों तक स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी के जिला भ्रमण के अनछुए पहलुओं को पहुंचाना है। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले सेनानियों के परिजनों को भी सम्मानित भी किया जाएगा। डायट प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र सिंह धपोला ने कहा कि इस यात्रा का पूरा विवरण एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा और स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाया जाएगा। संगोष्ठी के बाद यात्रा गरुड़ के लिए रवाना हुई।
गरुड़ पहुंचने पर यात्रा का गांधी चबूतरे में स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। गरुड़ में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में डायट की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह चौहान, मनोरथ दुबे, प्रेमानंद खोलिया, हरी दत्त खोलिया, चंद्र दत्त ममगाई, मोहन सिंह मेहता और खीमानंद पंत के परिवार वालों को सम्मानित किया गया। सेनानियों के पुत्र और पौत्रों ने यह सम्मान ग्रहण किया। कार्यक्रम में बीईओ उमेद सिंह रावत, प्रधानाचार्य मोहित कौशल, नंदन सिंह अल्मियां, दिनेश नेगी, वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के अलावा डिग्री कॉलेज गरुड़, राइंका कौसानी और गरुड़ के प्राध्यापक, शिक्षक, विद्यार्थी और डायट के शिक्षक प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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गरुड़ से गागरीगोल तक की गई पदयात्रा
बागेश्वर। वर्ष 1929 में महात्मा गांधी जब कौसानी आए तो उस समय गरुड़ तक मोटर मार्ग बना था। बापू ने कौसानी ने गरुड़ तक का सफर जीप से तय किया था। आगे की यात्रा उन्होंने डोली और पैदल चलकर पूूरी की। इसे ध्यान में रखते हुए सोमवार को यात्रियों ने गरुड़ से गागरीगोल तक की यात्रा पैदल तय की। गागरीगोल में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने भी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिव दत्त त्रिपाठी, शेर सिंह बोरा, हरक सिंह नेगी के परिजनों को सम्मानित किया गया। समन्वयक जोशी ने बताया कि 22 मार्च की सुबह यात्रा बागेश्वर के लिए रवाना होगी और स्वराज भवन में यात्रा का समापन किया जाएगा।
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