कुमाऊं में हाईकोर्ट का अहम स्थान है। हाईकोर्ट को अगर शिफ्ट करना ही है तो गौलापार उपयुक्त जगह है। सरकार को भी इसको लेकर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।
-दीपक शर्मा, भीमताल इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष।
कुमाऊं उत्तराखंड का अभिन्न अंग है। हाईकोर्ट कुमाऊं से नहीं जाना चाहिए। नैनीताल से अगर हाईकोर्ट हटता है तो स्वागत योग्य है। क्योंकि स्थानीय लोगों के अलावा अधिवक्ताओं, यात्रियों के अलावा सैलानियों को भी दिक्कत हो रही थी। जिले में ही कोई अन्य जगह एचएमटी या गौलापार जहा सहूलियत हो वहां हाईकोर्ट को ले जाना चाहिए।
- विजय तिवारी, बालाजी सेल्स के स्वामी।
कुमाऊं के पास हाईकोर्ट और नैनीताल के सिवा कुछ नहीं है। गढ़वाल में चारधाम यात्रा, हरिद्वार में कुंभ मेला होने के कारण वहां काफी विकास हुआ है। गौलापार सुंदर जगह है, यहां नया हल्द्वानी बसाया जा सकता है। अगर यहां नहीं तो रामनगर और रुद्रपुर में भी देखा जा सकता है।
- प्रमोद गोयल, नैनीताल एग्रो प्रोडक्ट के स्वामी।
नैनीताल पर्यटन स्थल है। लोगों को असुविधा न हो ऐसी जगह तलाशनी चाहिए। हल्द्वानी राज्य का सेंटर प्लेस है। हल्द्वानी में ही पांच से 10 किमी के दायरे में जहां वाहनों के आवागमन में दिक्कत न हो हाईकोर्ट को शिफ्ट किया जाना चाहिए।
- पीयूष डालाकोटी, केमिकल्स एंड मिनरल्स स्वामी हल्द्वानी।
हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करना कुमाऊं के हर व्यक्ति की अनदेखी है। इससे पर्यटन कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे। हाईकोर्ट गौलापास में स्थापित होना चाहिए। यदि इसे गढ़वाल शिफ्ट किया तो कारोबारी भी आंदोलन करेंगे।
- कमला होम स्टे संचालक, कटारमल, अल्मोड़ा।
हाईकोर्ट को नैनीताल से दूर किए जाने पर लोगों को आवाजाही करने की समस्या झेलनी पड़ेगी। रानीबाग या उधमसिंह नगर फिर भी एक अच्छा विकल्प है। जनता को इसमें आसानी होगी।इस पर विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट कुमाऊं में ही रहना चाहिए।
- पुष्पा कांडपाल, महिला उद्यमी हल्द्वानी।
हाईकोर्ट को नैनीताल जिले में ही कहीं अन्यत्र शिफ्ट किया जाने तक ठीक है लेकिन उससे बाहर यह फैसला सही नहीं है। इससे राजधानी के बाद अब न्याय के मामलों के लिए गढ़वाल के चक्कर काटने पड़ेगे। मैं हाईकोर्ट को शिफ्ट किए जाने के पक्ष में कतई नहीं हूं। इसे कुमाऊं में ही रहना चाहिए।
- मीनाक्षी पांडे, महिला उद्यमी।