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बैंड बाजों के साथ निकली श्रीराम की बरात

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दुगड्डा में निकलती श्रीराम की बारात। - फोटो : KOTDWAR
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श्री बाल रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन राम बरात, राजतिलक की घोषणा और मंथरा कैकेयी संवाद का मंचन किया गया। शहर में धूमधाम से बैंड बाजों के साथ श्रीराम की बरात निकाली गई।
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शुक्रवार रात को सिद्धबली मार्ग पर आयोजित रामलीला का बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पंत, आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद वर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारका प्रसाद अग्रवाल ने संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। इस अवसर पर शहर में श्रीराम, लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न चारों भाइयों की बरात बैंड बाजों के साथ निकाली गई। चारों भाइयों का विवाह संपन्न कराने के बाद राजा दशरथ की ओर से श्रीराम के राजतिलक की घोषणा की जाती है। यह सब सुनकर मंथरा कैकेयी को अपनी बातों से अयोध्या का राजा उनका पुत्र भरत बने और राम को 14 वर्ष का वनवास हो जैसी बातों से बरगला देती है। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष श्री ज्ञान सिंह नेगी, विनय भाटिया, पंकज अग्रवाल, नितिन गुप्ता, पंकज गुप्ता, विजय अग्रवाल, बंटी सतीजा, दिनेश शर्मा मौजूद रहे।
उधर, श्री रामलीला कमेटी मालवीय की ओर से मालवीय उद्यान में आयोजित रामलीला में मंथरा कैकेयी संवाद और राम वनवास का मंचन किया गया। मंचन में मंथरा के भड़काने पर रानी कैकेयी राजा दशरथ से श्रीराम को वन और भरत को राजा बनाने का वचन मांगती है। पिता के वचन का मान रखने के लिए श्रीराम, सीता और भाई लक्ष्मण को लेकर जंगल चले जाते हैं। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष विवेक अग्रवाल, हरीश बहरानी, महामंत्री धर्मवीर गुसाईं, प्रमोद रावत आदि मौजूद थे।
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वहीं श्री रामलीला कमेटी दुगड्डा की ओर से आयोजित 121वीं रामलीला मंचन के छठवें दिन बैंड बाजों के साथ भगवान श्रीराम की बरात निकाली गई। शुक्रवार रात को बतौर मुख्य अतिथि महिला कांग्रेस नेत्री रंजना रावत ने रामलीला मंचन का शुभारंभ किया। मंचन में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का विवाह संपन्न होता है। इस दौरान रामलीला के मंच पर ओपन डांस का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं और बच्चों ने सांस्कृतिक गीतों पर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर अध्यक्ष गौरव खैरवाल, सौरभ गुप्ता, प्रदीप बडोला, संजीव कोटनाला, बबली बिष्ट, शिव चंद्र, सोमप्रकाश, नितेश ठाकुर, अनूप गुप्ता, राहुल जैन, अमन जैन, रोहित, वीरेंद्र शाह और सुनील कुमार आदि मौजूद थे।
श्री राम ने तोड़ा शिव धनुष, सीता ने पहनाई वर माला
लैंसडौन। श्रीरामलीला आयोजन समिति की ओर से आयोजित 116वीं रामलीला मंचन के दूसरे दिन ताड़का वध और सीता स्वयंवर का मंचन किया गया।
शुक्रवार रात को रामलीला मंचन में साधु संतों को प्रताड़ित करने वाली राक्षस ताड़का का वध करने के बाद गुरु विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण जनकपुरी पहुंचे। जनकपुरी में माता सीता के स्वयंवर में कई देशों के राजा भी पहुंचते हैं। मुनि विश्वामित्र इस स्वयंवर में राम-लक्ष्मण को साथ लेकर पहुंचते हैं। स्वयंवर में आए विभिन्न राज्यों के राजा शिव धनुष तोड़ने में असफल होते हैं। शिव धनुष तोड़ने के लिए लंकापति लंकेश भी पहुंचते हैं। जैसे ही वह धनुष उठाने के लिए आगे बढ़ता है, उसी दौरान आकाशवाणी होती है जिस पर रावण बिना धनुष उठाए स्वयंवर स्थल से निकल जाता है। मुनि विश्वमित्र के कहने पर भगवान श्रीराम शिव धनुष में प्रत्यंचा चढ़ा कर उसे तोड़ देते हैं और सीता भगवान राम के गले में वरमाला डाल देती हैं। संवाद
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