भेदभाव करने पर प्रशिक्षु आयुर्वेद डॉक्टर भड़क गए। गुस्साए प्रशिक्षु डॉक्टरों ने एलोपैथ डॉक्टरों के बराबर मानदेय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस संबंध में मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भी ज्ञापन भेजा।
शनिवार को ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि अधिकतर राज्यों में स्नात्तकोत्तर प्रवेश परीक्षा में 85 प्रतिशत कोटा स्थानीय परीक्षार्थियों के लिए आरक्षित रखे जाने का प्रावधान है, लेकिन उत्तराखंड में यह कोटा मात्र 50 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है। इस कारण राज्य के प्रतिभावान छात्र अपने राज्य में भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने एलोपैथिक एवं आयुर्वेद इंटर्न (प्रशिक्षु) चिकित्सकों का मानदेय 7500 रुपये प्रतिमाह तय किया था, जो अभी तक चला आ रहा था, लेकिन एक सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री ने एलोपैथिक इंटर्न चिकित्सकों का मानदेय 7,500 बढ़ाकर 17 हजार रुपये करने की घोषणा कर दी, जबकि आयुर्वेद इंटर्न चिकित्सकों का मानदेय नहीं बढ़ाया गया। प्रदर्शन करने वालों में डॉ. शैलेश जोशी, डॉ. जयप्रकाश रावत, डॉ. अमित, डॉ. शशी कुमार, सर्वेज अली, डॉ. ज्योत्सना प्रधान, डॉ. तन्वी गोसाईं आदि मौजूद रहे।