कोरोनाकाल के दो साल बाद पहली बार एक अप्रैल से बिना कोविड की पाबंदियों के साथ नए सत्र की शुरूआत हो गई। सरकारी स्कूलों के बच्चों के हाथों में न किताबें पहुंच सकी और न ही किताबों के लिए पैसा मिला है। हालांकि, अब कोविड संक्रमण नहीं होने से बच्चों की फुल टाइम पढ़ाई हो सकेगी।
कोविड संक्रमण के चलते दो साल से एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। जिसके कारण बच्चों को घरों पर ही रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही थी। दो साल से सत्र के शुरू होते ही कोविड संक्रमण बढ़ने से स्कूलों में ताले लटक जाते थे। हालांकि, बीच-बीच में स्कूलों को ऑफलाइन शिक्षा के लिए खोला गया। पर संक्रमण बढ़ने से उन्हें फिर से बंद कर दिया जाता था। अब शासन की ओर से एक अप्रैल से कोविड की सभी पाबंदियां हटा ली हैं। इससे तीसरे साल स्कूलों का शिक्षा सत्र सामान्य रूप से एक अप्रैल से शुरू हो चुका है।
अब कक्षा एक से पांच तक स्कूलों में साढ़े तीन घंटा होने वाली पढ़ाई भी पूरे समय होगी। शुक्रवार को पास होकर नई कक्षाओं में आए बच्चों की नई कक्षाएं शुरू हो गईं। कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के बच्चों ने कक्षाओं में पढ़ाई शुरू की। लेकिन सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक बच्चों को दी जाने वाले किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जबकि पिछले महीने से स्कूलों से बच्चों को किताबें उपलब्ध कराने के लिए डाटा मांगा लिया गया था। मगर किताबें नहीं दी गईं। पहले दिन बच्चे बिना किताबों के इधर-उधर घूमते हुए नजर आए। राजकीय प्राथमिक शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह का कहना है कि बच्चों को सत्र शुरू होने से पहले ही किताब देने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। जल्द ही बच्चों को किताब उपलब्ध कराने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी से मिला जाएगा। उधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल का कहना है कि बच्चों को जल्द ही किताबें मुहैया कराई जाएंगी। जिससे बच्चे स्कूलों में अपनी पढ़ाई शुरू कर सकें।