पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण प्रक्रिया शुरू करने के आदेशों ने गांवों में राजनीति का माहौल गर्म कर दिया है। इससे चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ग्रामीणों की अब जिला प्रशासन की ओर से किए जाने वाले आरक्षण पर निगाहें लगी हुई हैं, क्योंकि आरक्षण से चुनाव लड़ने के किसी के सपनों पर पानी फिर जाएगा तो किसी के लिए आरक्षण मुफीद साबित होगा।
ग्राम पंचायतों के कार्यकाल को समाप्त हुए साढ़े आठ माह का समय गुजर चुका है, लेकिन अभी तक पंचायतों में चुनाव नहीं कराए जाने से बतौर प्रशासक एडीओ पंचायत कार्य देख रहे हैं, जबकि ग्रामीणों की ओर से लगातार पंचायत चुनाव कराने की मांग की जा रही है। इसके लिए हाईकोर्ट में भी रिट दायर की गई है। बृहस्पतिवार शाम को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शासन की ओर से आरक्षण निर्धारित करने के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया गया था। इससे पंचायतों में लंबे समय बाद राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। चुनाव होने की संभावना पैदा होने से भावी दावेदार फिर से सक्रिए होने लगे हैं।
ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के लिए आरक्षण को लेकर भावी दावेदारों की नजर लगी हुई है। माना जा रहा है कि इस बार आरक्षण होने से प्रधान पदों से लेकर जिला पंचायत की सीटों में काफी फेरबदल होने की उम्मीद है। इससे कुछ दावेदारों को निराश भी होना पड़ सकता है तो कुछ की लॉटरी भी खुल सकती है। उधर, जिला पंचायत राज अधिकारी आरसी त्रिपाठी का कहना है कि पंचायतों में आरक्षण को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 29 नवंबर को अनंतिम आरक्षण का प्रकाशन कर दिया जाएगा।