प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और हरीश रावत सरकार के बहाल होने संबंधी हाईकोर्ट का कोई लिखित आदेश आने के पहले ही सचिवालय के चौथे तल पर नेम प्लेटें बदल दी गईं।
जैसे ही राष्ट्रपति शासन हटने की खबर मिली आनन-फानन में राज्यपाल की नेम प्लेट हटा दी गई और इसके स्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नेम प्लेट लगा दी गई। हालांकि इस संबंध में सचिवालय प्रशासन को कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला था।
राज्यपाल के साथ ही उनके दो सलाहकारों की नेम प्लेट भी हटवा दी गई। कोर्ट के फैसले की खबर के चंद घंटों के बाद चौथे तल का नजारा राष्ट्रपति शासन के पहले जैसा हो गया था। मुख्यमंत्री के रूप में हरीश रावत की नेम प्लेट शुक्रवार शाम तक लगी रही।
सचिवालय प्रशासन आया हरकत में
जैसे ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले पर स्थगनादेश की खबर आई सचिवालय प्रशासन फिर हरकत में आया। कर्मचारियों ने जल्दी से जाकर हरीश रावत की नेम प्लेट हटाई और उसके स्थान पर राज्यपाल की नेम प्लेट लगा दी। लेकिन, देर शाम तक राज्यपाल के सलाहकारों की नेम प्लेट नहीं लगाई गई थी।
राज्यपाल के सलाहकारों के स्थान पर किसी अफसर की नेम प्लेट नहीं लगाई थी। अधिकारियों को इंतजार था कि चौथे तल के सलाहकारों के खाली कक्ष पर जिन्हें भेजा जाएगा उनके नाम की प्लेट लगा दी जाएगी।