चंपावत। रोडवेज स्टेशन बनने के दो साल बाद भी इसका खास लाभ मुसाफिरों को नहीं मिल पा रहा है। इस स्टेशन से सिर्फ एक बस संचालित होती है।
लंबे समय से क्षेत्र के लोग दो और बसों को चलाने की मांग कर रहे हैं लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। इस वजह से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कई बार पिथौरागढ़ या टनकपुर की ओर से आने वाली बसों में सीट न मिलने से भी परेशानी होती है।
27 जनवरी 2019 को स्थानीय रोडवेज स्टेशन अस्तित्व में आया। बस स्टेशन के खुलने से इंतजार करने वाले यात्रियों को सुविधाएं मिलने लगीं, लेकिन बसों की कमी फिर भी दूर नहीं हो सकी है।
इससे यहां के मुसाफिरों की परेशानी बदस्तूर जारी है। फिलहाल चंपावत के इस स्टेशन से एकमात्र बस सुबह आठ बजे नैनीताल जाती है, जबकि नागरिक यहां से देहरादून और दिल्ली के लिए एक-एक बस के नियमित रूप से चलाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं।
चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति के नेता बसंत तड़ागी का कहना है कि लोहाघाट या पिथौरागढ़ से आने वाली बसों का लंबा इंतजार करना पड़ता है।
कई बार जगह न मिलने से दिक्कत आती है। इसके चलते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने यहां से बस सेवा संचालित न करने तक चंपावत से बैठने वाले यात्रियों के लिए सीटों को आरक्षित करने की मांग की।
रोडवेज परिसर से टैक्सियां भर रही सवारी
चंपावत। बस स्टेशन में रोडवेज की बसों का भले ही टोटा हो, लेकिन टैक्सियां परिसर के भीतर अक्सर नजर आ जाएंगी। यहां तक कि कई बार ये टैक्सियां भीतर से सवारियां भी ढोती हैं लेकिन निगम प्रशासन का इस पर कोई अंकुश नहीं है।
रोडवेज स्टेशन चंपावत से अभी नैनीताल के लिए ही बस सेवा है। इस सेवा में भी यहां से आठ-दस यात्री ही मिल पाते हैं। फिलहाल दिल्ली या देहरादून के लिए चंपावत से बस सेवा के संचालन का कोई प्रस्ताव नहीं है। रोडवेज परिसर से अनधिकृत वाहनों को हटाया जाएगा।
- नरेंद्र कुमार गौतम, सहायक मंडलीय प्रबंधक, रोडवेज।