चंपावत। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिंदी हैं हम कार्यक्रम के तहत हुई काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने हिंदी भाषा की दशा और दिशा को लेकर तीखे कटाक्ष करते हुए काव्यपाठ किया।
वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष जोशी की अध्यक्षता और सतीश जोशी के संचालन में हुई काव्य गोष्ठी में राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने इस काव्यपाठ (हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा भाल की बिंदी बनी हिंदी तू महान है, अंग्रेजियत के दौर में आज सारा विश्व कर रहा तेरा गुणगान है।) के साथ आगाज किया।
जीआईसी सिप्टी के प्रधानाचार्य सामश्रवा आर्य ने कहा- क्यों भूलते हो हिंदी को, हिंदी से तुम बड़े हुए हो, हिंदी से पढ़ लिख कर ही अपने पैरों में खड़े हुए हो कविता से हिंदी की महिला बताई। गोष्ठी में जीवन अनमोल अस्पताल ने विशेष सहयोग किया।
साहित्यकार हिमांशु जोशी ने अंग्रेजी भाषा पर यूं तंज कसा- अंग्रेजी भाषा का देश हुआ गुलाम है अब तो यह चलन हुआ आम है, हाथ में लेकर गंगा जल लें। संकल्प हिंदी को बनाएंगे सब भाषाओं का विकल्प।
प्रधानाध्यापिका अंजू पांडेय ने कहा- अंग्रेजियत के मायाजाल में कैसे उलझे लोग, हिंदी के महत्व को भूले सारे लोग, साहित्यकार सुभाष जोशी ने-हिंदी अजब निराली है, तेरी महिमा सबसे न्यारी है, ज्ञानदायिनी गीता जैसी, हिंदी सबकी दुलारी है।
पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. विष्णुदत्त भट्ट सरल ने- करें कहां तक कितना हिंदी, वही पुराना तेरा गुणगान, तू है भारत माता के माथे की बिंदी, तुझमें समाएं हैं कई रसखान, जन कवि प्रकाश जोशी शूल ने कहा- वो लिखता है तो लिखने दे, वो दिखता है तो दिखने दे, आड़ी-टेड़ी सीधी-तिरछी जैसी भी है कलम उसकी, वो घिसता है तो घिसने दे, वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चंद्र पांडेय ने कहा- मधु जैसी जिसमें है मिठास, सरताज बने हिंदी यही है हमारी आस कविता पेश की।
शिक्षक जनार्दन राय ने भी कविता पेश की। स्वतंत्रता सेनानी संगठन जिलाध्यक्ष महेश चंद्र चौड़ाकोटी, भेषज संघ संस्थापक अध्यक्ष हरगोाविंद बोहरा, मुकुल पांडेय आदि थे।
जन-जन से जोडने की प्रभावी पहल : दीपक जोशी
चंपावत। जीवन अनमोल अस्पताल के प्रबंध निदेशक दीपक जोशी ने कहा कि हिंदी भाषा को जन-जन की भाषा बनाने के लिए सफर तय करना होगा। राजभाषा को राष्ट्रभाषा बनाया जाना चाहिए। पढ़ाई और कमाई से जोड़ कर हिंदी को लोकप्रिय बनाया जा सकता है। हिंदी हैं हम कार्यक्रम के जरिए अमर उजाला ने हिंदी को जन-जन से जोड़ने की प्रभावी पहल की है।
काव्य श्री सम्मान से नवाजे गए शिक्षक राय
चंपावत। विश्व के सबसे बड़े आभासी कवि सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले शिक्षक जितेंद्र राय को काव्य श्री सम्मान से नवाजा गया है। पौड़ी गढ़वाल निवासी जितेंद्र इस वक्त यहां दियारतोली जीआईसी में शिक्षक हैं।
शिक्षक राय ने इस साल 11 जुलाई से 20 जुलाई तक 207 घंटे चले आभासी कवि सम्मेलन में हिस्सा लिया था। ये सम्मेलन इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। बाजपुर की बुलंदी जज्बात-ए-कलम संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष विवेक बादल, उपाध्यक्ष राकेश शर्मा, सचिव मातृका बहुगुणा और संगठन मंत्री अभिषेक मिश्रा ने उन्हें ये सम्मान दिया।