गोपेश्वर में भू-कानून पर आयोजित गोष्ठी में अपने विचार रखते वक्ता।
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जनप्रतिनिधियों, सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों और चमोली बार एसोसिएशन ने उत्तराखंड में सशक्त भू-कानून की पैरवी की। वक्ताओं ने कहा कि राज्य में भूमि की बंदोबस्त व्यवस्था फिर से लागू की जानी चाहिए और बंजर भूमि को जो जोतेगा, उसे उस भूमि का मालिकाना हक दिया जाना चाहिए। भू-कानून को लागू करने के लिए वन, राजस्व, कृषि, अधिवक्ता व अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जानी चाहिए।
नगर के जयदीप भवन में भू-कानून पर हुई गोष्ठी में पूर्व विधायक कुंवर सिंह नेगी ने कहा कि मौजूदा समय में राज्य में 4 लाख हेक्टेयर बंजर भूमि है। यहां काश्तकारी नहीं हो रही है। लिहाजा इस भूमि को जोतने वाले काश्तकार को इसका मालिकाना हक दिया जाना चाहिए। इससे पलायन रुकेगा। उन्होंने वन पंचायतों को राजस्व विभाग के अधीन करने की मांग उठाई। जिला बार संघ के अध्यक्ष भरत सिंह रावत ने स्थायी निवास की जगह मूल निवास प्रमाणपत्र की व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया। नेहरू युवा केंद्र के पूर्व जिला समन्वयक डा. योगेश धस्माना ने कहा कि भू-कानून न होने से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था भी संकट में है। इस मौके पर बार संघ के सचिव संदीप सिंह रावत, मोहन पंत, श्री नंदा महिला लोक विकास समिति की सचिव डा. किरन पुरोहित, ऊषा रावत, पालिका सभासद ऊषा फरस्वाण, सुशीला सेमवाल, चंद्रकला बिष्ट आदि मौजूद थे।