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13वें दिन भी नहीं खुल पाया मलारी हाईवे

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मलारी हाईवे को खोलने में जुटे बीआरओ के मजदूर। - फोटो : GOPESHWAR
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चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे बृहस्पतिवार को 13वें दिन भी सुचारु नहीं हो पाया है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की जेसीबी और मजदूर हाईवे खोलने में जुटे हैं। बीआरओ के अधिकारियों ने शुक्रवार तक हाईवे सुचारु करने का दावा किया है। वहीं, हाईवे बंद होने से नीती घाटी के ग्रामीणों के ग्रामीणों के साथ ही सेना और आईटीबीपी के जवान जान जोखिम में डालकर पैदल आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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बीते 14 अगस्त से मलारी हाईवे तमक गांव के समीप चट्टान से भूस्खलन के कारण बंद है। तब से नीती घाटी के 14 गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही बाधित है। भूस्खलन करीब 500 मीटर एरिया में फैला हुआ है। भूस्खलन से नीती घाटी की बिजली लाइन भी तहस-नहस पड़ी है। ग्रामीण छिल्लों के सहारे रात काट रहे हैं। सेना व आईटीबीपी के कैंपों में सोलर लाइन से रोशनी की जा रही है। बीआरओ के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने बताया कि हाईवे पर बड़े-बड़े बोल्डरों को विस्फोट से तोड़ा जा रहा है। क्षेत्र में पांच जेसीबी और 50 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। शुक्रवार तक हाईवे सुचारु होने की उम्मीद है।
एक दिन ही चल पाई हेलीकॉप्टर सेवा
जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरतमंदों की आवाजाही के लिए क्षेत्र में 23 अगस्त को हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की, लेकिन मौसम खराब होने के कारण यह सेवा मात्र एक दिन ही चल पाई। अब ग्रामीण एनडीआरएफ और एसडीएआरएफ के जवानों की सहायता से भूस्खलन क्षेत्र में आवाजाही कर रहे हैं।
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