निजमुला घाटी में कंधे पर डंडों के सहारे ट्रांसफार्मर को गांव तक पहुंचाते बौना तोक के ग्रामीण।
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निजमुला घाटी के ग्राम पंचायत पाणा के बौणा तोक में ट्रांसफार्मर फुंकने से दो माह से बिजली आपूर्ति ठप है। ऊर्जा निगम ने गांव के लिए ट्रांसफ ार्मर तो भेजा लेकिन गांव तक नहीं पहुंचाया गया। ऐसे में ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर कंधे पर उठाकर आठ किमी पैदल चलकर गांव तक पहुंचाया तब जाकर गांव में बिजली सुचारु हो पाई।
बौणा तोक में अनुसूचित जाति के 25 परिवार रहते हैं। बीते अगस्त माह में बारिश और तूफान के दौरान गांव की 11 केवी की बिजली लाइन पर फॉल्ट आने से ट्रांसफार्मर फुंक गया था। तब से ग्रामीण ऊर्जा निगम के अधिकारियों से गांव में ट्रांसफार्मर स्थापित करने की मांग कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो दिन पूर्व ऊर्जा निगम ने गोपेश्वर से गांव के लिए बिरही-निजमुला सड़क मार्ग से पगना गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया दिया लेकिन बौणा गांव तक सड़क न होने और पैदल दूरी आठ किमी होने पर ट्रांसफार्मर बौणा गांव तक नहीं पहुंचाया गया। दो दिन बाद भी जब ऊर्जा निगम की ओर से कोई ट्रांसफार्मर गांव तक पहुंचाने नहीं आया तो ग्रामीणों ने स्वयं ही कंधे पर लकड़ी के डंडों के सहारे ट्रांसफार्मर को उठाया और आठ किमी पैदल तक गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचा दिया। इसके बाद देर शाम को गांव में बिजली सप्लाई सुचारु हो गई। ट्रांसफार्मर ले जाने में ग्रामीण कामदेव बिष्ट, प्रकाश रावत, विजय, हिम्मत, आनंद सिंह, पूरन सिंह, शिव फरस्वाण, जितेंद्र कुमार, मुकेश आदि शामिल रहे। इधर, ऊर्जा निगम के ईई कैलाश कुमार ने बताया कि सड़क से गांव तक ट्रांसफार्मर को पहुंचाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इस संबंध में क्षेत्र के अवर अभियंता से जानकारी ली जाएगी।