बागेश्वर के राजकीय इंटर कॉलेज वज्यूला में गमलों के साथ विद्यार्थी और शिक्षक। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। राइंका वज्यूला में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ बेकार की वस्तुओं से उपयोगी सामान तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नवाचारी विद्या के तहत इन दिनों विद्यार्थी बेकार कपड़े और सीमेंट को मिलाकर गमले तैयार कर रहे हैं। बाजार में एक गमले की कीमत 100 से 500 रुपये के बीच है, वहीं स्कूल में महज 14 रुपये के खर्च में एक गमला तैैयार हो रहा है। एक कट्टा सीमेंट में 35 गमले बनाए जा रहे हैं। विद्यालय में बनाए गए इन गमलों का उपयोग स्कूल की वाटिका में किया जा रहा है।
राइंका वज्यूला की कला शिक्षिका राजेश्वरी कार्की पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को कला, पेंटिंग, रिंगाल के उत्पाद बनाने का समय-समय पर प्रशिक्षण देती हैं। वे इन दिनों पुराने और बेकार कपड़ों, खाली कट्टों और सीमेंट का प्रयोग कर गमला बनाना सिखा रही हैं। शिक्षिका कार्की ने बताया कि वर्तमान में हर गमले में फूल उगाने का चलन बढ़ता जा रहा है। बाजार में तरह-तरह के गमले उपलब्ध हैं लेकिन हर कोई उन्हें खरीद नहीं सकता है। उन्होंने कम कीमत पर आकर्षक गमले बनाने का प्रयास किया है। गमला बनाना सीख रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि जिन कपड़ों को हम बेकार समझ कर फेंक देते थे, अब उनके उपयोग से गमले तैयार कर रहे हैं। इस विधि से गमले बनाना आसान है और खर्च भी काफी कम हो रहा है। स्कूल के प्रधानाचार्य आरके मिश्रा, भौतिक विज्ञान प्रवक्ता आलोक पांडेय, हरीश फर्स्वाण, पूनम बिष्ट, हिमांशु जोशी आदि ने शिक्षिका और विद्यार्थियों के कार्य की सराहना की है।