बागेश्वर। बागेश्वर के महोली निवासी नीरज राठौर का चयन प्रदेश की अंडर-25 क्रिकेट टीम में हुआ है। ओपनर बल्लेबाज के तौर पर खेलने वाले नीरज आक्रामक बैटिंग करते हैं। टीम में चयन होने के बाद वह आगामी सत्र में राष्ट्रीय स्तर की कर्नल सीके नायडू प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगे। उनके चयन से जिले में खुशी का माहौल है।
दुग नाकुरी तहसील के गांव महोली निवासी नीरज के पिता गंगा सिंह सेना में सूबेदार पद पर तैनात हैं। इन दिनों उनकी पोस्टिंग जम्मू में है। माता पार्वती देवी अपनी दो बेटियों के साथ लखनऊ में रहती हैं। दो बहनों के इकलौते भाई नीरज देहरादून में एकेडमी चलाते हैं। फोन पर नीरज ने बताया कि 17 साल की उम्र से वह क्रिकेट खेल रहे हैं और उनका सपना देश की टीम से खेलने का है। धाकड़ बल्लेबाज नीरज ने इस साल कई बेहतरीन पारियां खेलकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने पिछले वर्ष टी-20 मैच में मात्र 26 गेंदों में शतक जड़ा था।
कड़ी मेहनत को बताया सफलता का मंत्र
बागेश्वर। नीरज का कहना है कि सफल होने के लिए कोई शॉर्टकर्ट नहीं है। कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण से ही सफलता हासिल की जा सकती है। नीरज ने कक्षा तीन तक की शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से हासिल की थी। फिर वह अपने पिता के साथ पठानकोट चले गए। वहीं से उन्होंने हाईस्कूल तक की पढ़ाई की। इस बीच उनका परिवार लखनऊ आकर बस गया। लखनऊ में पढ़ाई के दौरान उनका रुझान क्रिकेट की तरफ हो गया। इंटरमीडिएट करने के बाद वह बेहतर प्रैक्टिस के लिए दिल्ली चले गए। एकेडमी में कुछ साल तक अभ्यास करने के बाद वह देहरादून चले आए। देहरादून में वह क्रिकेट कॅरियर को आगे बढ़ाने के साथ एकेडमी खोलकर युवाओं को भी क्रिकेट के गुर सिखा रहे हैं।
बॉलर का कद नहीं बॉल की मेरिट देखकर लगाते हैं शॉट
बागेश्वर। आक्रामक बल्लेबाज नीरज का कहना है कि बल्लेबाजी के दौरान वह बॉलर का कद नहीं बॉल की मैरिट देखकर शॉट लगाते हैं। उनका कहना है कि खेल में डर की कोई जगह नहीं होती है। निर्भीक होकर बल्लेबाजी करना उन्हें पसंद है। नीरज का कहना है कि क्रिकेट में बार-बार मौके नहीं मिलते। जब भी मौका मिले अपनी प्रतिभा को साबित करने का प्रयास करना बेहद जरूरी है।
मनीष और कमलेश की तरह नाम कमाने की चाह
बागेश्वर। बागेश्वर के मूल निवासी मनीष पांडेय और कमलेश नगरकोटी क्रिकेट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। नीरज का सपना भी इन्हीं क्रिकेटरों की राह पर चलकर बागेश्वर का नाम रोशन करना है। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। फिलहाल उनका पूरा ध्यान आगामी प्रतियोगिता पर है।