अल्मोड़ा/सोमेश्वर। राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधा कृष्णन के जन्म दिन शिक्षक दिवस पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम हुए। जय श्री कॉलेज खत्याड़ी के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
छात्र छात्राओं ने दीप जलाकर और केक काटकर शिक्षकों का सम्मान किया। कॉलेज के चेयरमैन भानु प्रकाश जोशी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का दर्जा माता-पिता के समान ही होता है। शिक्षक हमेशा विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देकर सही रास्ता दिखाते हैं। शिक्षक ही भविष्य की चुनौतियों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करता है। उन्होंने कहा कि पांच सितंबर 1962 से भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत हुई। प्रधानाचार्या श्रीमती चंपा कनवाल, कॉलेज के सीईओ प्रमोद कुमार जोशी ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में राजेंद्र तिवारी, पंकज चन्याल, निरंजन तिवारी, शिवानी जोशी, दीक्षांत कार्की, मनोज बिष्ट, प्रवीण गुणवंत, रजिया, रश्मि देवड़ी, कृष्ण कुमार, आशीष जोशी आदि मौजूद रहे।
शिक्षक दिवस पर कल्पना कृति जन महिला जागृति समिति ढूंगाधारा के मुख्य संरक्षक कमल कुमार बिष्ट के नेतृत्व में अवनि वन ग्राम गर नैनी कुंस्याल में पौधे रोप गए। गीता बिष्ट, मंजू बिष्ट, अवनि बिष्ट, दया देवी, मोहन सिंह, अनंत बिष्ट, दीपक कांत पांडे आदि शामिल हुए। उधर आनंद वैली सीनियर सेकेंडरी स्कूल सोमेश्वर में शिक्षक दिवस के अवसर पर बच्चों ने शिक्षकों के सम्मान में रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया। बच्चों ने शिक्षकों के लिए कई खेल भी आयोजित किए। आयोजन में छात्र पवन भंडारी, पलक पांडे, नितिन कांडपाल, मिताली जोशी, अनुज भाकुनी आदि ने सहयोग किया। प्रधानाचार्य अशोक शर्मा ने बच्चों का आभार जताया।
प्राथमिक और जूहा पाखुरा के शिक्षकों को किया सम्मानित
अल्मोड़ा। राष्ट्रीय जन सेवा समिति अल्मोड़ा ने शिक्षक दिवस पर राजकीय जूनियर हाईस्कूल पाखुरा, राजकीय प्राइमरी विद्यालय पाखुरा में कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षकों को सम्मानित किया। संस्था अध्यक्ष शोभा जोशी, महासचिव प्रकाश रावत ने शिक्षिका सरिता बिष्ट, चंद्रा जोशी, दीपा टम्टा, सुशीला गुरुरानी तथा भोजन माता शांति देवी, आशा देवी को सम्मानित किया। संस्था की ओर से सभी बच्चों को स्कूल बैग भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में चंद्रा बिष्ट, दीपा टम्टा, विवेक मुस्यूनी, रविंद्र सिंह मुस्यूनी, जीवन मुस्यूनी, खष्टी, बीना देवी, संतोषी, जीवन सिंह, महिपाल सिंह रावत, कृष्णा जोशी आदि मौजूद थे। संवाद