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Tokyo Olympics: अच्छी सुविधाएं मिलें तो अगली बार स्वर्ण पक्का - मीर रंजन नेगी

Fri, 06 Aug 2021 08:54 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो रोहित भट्ट, अमर उजाला, अल्मोड़ा

सार

हॉकी भारतीय टीम के पूर्व गोलकीपर मीररंजन नेगी ने विशेष बातचीत में कहा कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रदर्शन सराहनीय है।
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मीर रंजन नेगी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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भारतीय पुरुष हॉकी टीम द्वारा 41 साल बाद टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से खेल प्रेमियों में जबरदस्त खुशी है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर मीर रंजन नेगी ने इसे भारतीय हॉकी खेल जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक हासिल कर करोड़ों खेल प्रेमियों का सपना पूरा किया। कांस्य पदक जीतना स्वर्ण पदक के बराबर ही है। यदि हमारे खिलाड़ियों को सुविधा और अच्छी तकनीक से प्रशिक्षण मिले तो वह और बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

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हॉकी भारतीय टीम के पूर्व गोलकीपर मीररंजन नेगी ने विशेष बातचीत में कहा कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रदर्शन सराहनीय है। उनका मानना है कि कि यदि भारतीय पुरुष हॉकी टीम को अच्छी सुविधाएं और अच्छा प्लेटफॉर्म मिले तो अगली बार वह स्वर्ण पदक लेकर ही देश लौटेंगे। उन्होंने साफ कहा कि हमारे खिलाड़ी कम संसाधनों में भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इस बात को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर सच साबित कर दिया है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश को बेहतरीन गोलकीपर बताया। उन्होंने कहा कि मैं भी एक गोलकीपर रहा हूं। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल में बढ़त बनाने के बावजूद अर्जेटीना के हाथों 1-2 से हार गई। उन्होंने कहा कि भारत की बेटियां हारीं जरूर पर उन्होंने सराहनीय प्रदर्शन किया। आने वाले समय में वह महिला हॉकी में स्वर्ण पदक का सपना जरूर पूरा करेंगी।
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उत्तराखंड में नहीं हो रहा है खेलों का विकास: नेगी
पूर्व गोलकीपर मीर रंजन नेगी मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के ओडला (मजखाली) के रहने वाले हैं। अभी वह इंदौर में रहते हैं। मीर रंजन नेगी इंदौर में खिलाड़ियों को फुटपाथ पर ट्रेनिंग देकर हॉकी के गुर सिखा रहे हैं। नेगी ने कहा कि सारी तवज्जो सिर्फ क्रिकेट को दी जा रही है। अन्य खेलों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। उत्तराखंड में खेलों का विकास नहीं हो रहा है।

यहां स्थिति सुधारने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में पलायन कर दूसरे राज्यों अथवा टीमों की ओर से खेलने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड में खेल नीति अच्छी होगी तो खिलाड़ी अपने ही राज्य से खेलेंगे। इससे खेलों में उत्तराखंड का नाम भी रोशन होगा।

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