रानीखेत (अल्मोड़ा)। अंग्रेजों ने जब 1869 में रानीखेत में छावनी बसाई, इसके साथ ही एक अलग परगने के रूप में प्रशासनिक इकाई की नींव भी पड़ गई थी। पाली रानीखेत के नाम से 1986 तक मात्र एक तहसील थी।
जो अब छह तहसीलों में बंट चुकी है, किंतु अलग जिले का गठन अभी तक नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि रानीखेत जिला बन जाता तो व्यापारियों के कारोबार में बढ़ोतरी होती, छोटे छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय अल्मोड़ा के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
1947 तक ब्रिटिश भारतीय शासन के अधीन रानीखेत में तहसील खुली और संपूर्ण आधारभूत ढांचा विकसित होता चला गया। 1986 में भिकियासैंण तहसील तथा 2005 में सल्ट, द्वाराहाट और चौखुटिया तहसीलें भी बन गई। दूसरी तरफ रानीखेत उपमंडल को जिले का दर्जा देने की मांग आजादी के बाद से ही उठने लगी थी। 1985 में बड़ा आंदोलन हुआ। इसके बाद भी आंदोलन होते रहे।
जन आंदोलनों के दौरान ही नहीं वरन चुनावी सभाओं के दौरान भी राजनीतिक दलों ने अलग जिले के लिए सब्जबाग दिखाए। जिला नहीं बना। इधर आसपास के कसबाई क्षेत्रों के लोगों ने भी रानीखेत के जिला आंदोलन को अपना समर्थन देने की बात कही है। चौबटिया के व्यवसायियों का कहना है कि जिला बनने से ही उनके कारोबार में बढ़ोतरी होगी।
-रानीखेत जिले की मांग सबसे पुरानी है, लेकिन आज तक जिला नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। चौबटिया सहित आस पास के दूर दराज के ग्रामीणों को जिला बनने से लाभ होगा। हमारे कस्बे विकसित होंगे तो कारोबार भी फलेगा।
-जीवन फर्त्याल, व्यापारी, चौबटिया।
-रानीखेत जिले को लेकर अब निर्णायक आंदोलन किए जाने की जरूरत है। सभी लोगों को एकजुट किया जाना चाहिए और आगामी दो माह तक संघर्ष करना होगा। चौबटिया के व्यापारी रानीखेत जिला आंदोलन के साथ हैं। क्षेत्र के विकास के लिए जिला बेहद जरूरी है।
-पुष्कर बेलवाल, व्यापारी, चौबटिया।
-छोटी छोटी प्रशासनिक इकाइयों के गठन से ही पहाड़ का विकास संभव है। वर्तमान में कारोबार पूरा चौपट हो रहा है। जिला बनने से कई कार्यालय खुलेंगे, इससे हमारे क्षेत्र को ही लाभ मिलेगा। जिला आंदोलन एकजुटता और प्रतिबद्धता के साथ होना चाहिए। पूर्व में भी आंदोलनों को सहयोग किया था।
-नवीन बेलवाल, व्यापारी रानीखेत।
व्यापार संघ और युवाओं को संभालनी होगी कमान : बड़ोला
रानीखेत। चारों घोषित जिलों की समिति के मुख्य संरक्षक डीएन बड़ोला ने व्यापार संघ पदाधिकारियों से खुलकर जिला आंदोलन के साथ आने को कहा है, उन्होंने कहा कि सबसे अधिक फायदा व्यापारियों को ही होगा। उन्होंने कहा कि रानीखेत के युवाओं को भी आंदोलन की कमान संभालनी चाहिए। कहा कि मात्र दो माह का समय बचा है, आंदोलन होना चाहिए, आलोचना नहीं करनी चाहिए।